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Shivpriya Nagpuri
ye zindagi bhi qiston men hamne guzaar dii
ye zindagi bhi qiston men hamne guzaar dii | ये ज़िन्दगी भी क़िस्तों में हमने गुज़ार दी
- Shivpriya Nagpuri
ये
ज़िन्दगी
भी
क़िस्तों
में
हमने
गुज़ार
दी
ज़ख़्मों
की
आग
हँस
के
जिगर
में
उतार
दी
सुनता
नहीं
कोई
यहाँ
आवाज़
दें
किसे
हमने
तो
जिस्म
से
नहीं
दिल
से
पुकार
दी
क्यूँ
दूर
दूर
रहते
हो
ग़ैरों
की
बज़्म
में
जैसे
कि
ये
ख़ुशी
हमें
तुमने
उधार
दी
साक़ी
तुम्हारे
नाम
की
पीते
रहे
थे
जो
आख़िर
तुम्हारे
होंठों
के
सदक़े
उतार
दी
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ऐ
मेरे
दोस्त
यहाँ
दुश्मनों
का
नाम
न
ले
दिल
उन्हीं
रास्तों
पे
कल
कहीं
आराम
न
ले
मय-कदे
में
गया
कम-ज़र्फ़
वो
बदनाम
हुआ
ज़िंदगी
डूब
न
जाए
अभी
से
जाम
न
ले
मुद्दतें
नाम
कमाने
में
लगी
हैं
मुझको
तू
मेरा
नाम
ज़माने
में
सर-ए-आम
न
ले
बात
बन
जाए
अगर
सब्र
रखा
जाएगा
बे-रुख़ी
से
मेरे
बंदे
तू
कोई
काम
न
ले
दूर
मंज़िल
है
तुझे
इसकी
ख़बर
रखनी
थी
तेरे
दिन
है
नहीं
आराम
के
आराम
न
ले
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बड़े
लोगों
से
फ़ासला
रखना
ऐसे
लोगों
से
यारी
क्या
रखना
यूँँ
तो
आसाँ
नहीं
था
मेरे
यार
आईने
में
ही
आईना
रखना
हार
जाना
क़ुबूल
मत
करना
बात
बन
जाए
हौसला
रखना
लुट
गए
रास्ते
तो
लुट
जाए
साथ
इक
ऐसा
क़ाफ़िला
रखना
ज़िंदगी
जोड़
देती
है
मिसरे
साथ
अच्छा
सा
क़ाफ़िया
रखना
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हमने
तुम्हारी
याद
में
रातें
गुज़ार
दीं
वीरानियाँ
भी
चुपके
से
दिल
में
उतार
दीं
दिल
तो
मगर
वही
रहा
पर
वो
बदल
गए
हम
ख़ाक
हो
गए
उन्हें
साॅंसें
उधार
दीं
आँखों
में
झाँकने
लगे
चुपके
से
हम
उन्हें
लेकिन
उन्होंने
दिल
में
ही
आँखें
उतार
दीं
क़िस्मत
ने
साथ
पल
भी
हमारा
नहीं
दिया
हम
ने
तड़प
तड़प
के
ये
रातें
गुज़ार
दीं
साजन
के
इन्तिज़ार
में
पायल
रही
उदास
हमने
भी
चूड़ियाँ
सभी
हँस
के
उतार
दीं
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याद
इक
आनी
थी
शायद
ये
वही
हो
जैसे
तू
नहीं
है
तो
लगे
साँस
रुकी
हो
जैसे
तूने
हाथों
की
लकीरों
में
पढ़ा
क्या
होगा
सोच
कर
जिसको
तेरी
नींद
उड़ी
हो
जैसे
अब
भी
लगता
है
कि
तू
मुझ
में
कहीं
शामिल
है
रूह
ख़ामोश
नज़र
ढूँढ़
रही
हो
जैसे
तेज़
बारिश
में
निकल
आता
भला
कौन
ऐसे
ऐसे
में
ही
तुझे
रोने
की
पड़ी
हो
जैसे
तू
जो
मिलने
को
चला
आए
तो
लगता
ऐसे
आख़िरी
बार
ही
मिलने
की
घड़ी
हो
जैसे
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क्यूँ
क़रीब
आते
हो
इतना
बात
को
समझो
ज़रा
हो
रहा
है
ये
न
अच्छा
बात
को
समझो
ज़रा
तुम
मुझे
इतना
न
चाहो
हम-सफ़र
तो
हो
नहीं
मत
बनाओ
तुम
तमाशा
बात
को
समझो
ज़रा
आह
करते
ही
हुए
हैं
शहर
में
बदनाम
हम
हो
रही
है
अपनी
चर्चा
बात
को
समझो
ज़रा
इस
सेे
पहले
बे-वफ़ा
मैं
हो
न
जाऊँ
हम-नफ़स
कर
दिया
यादों
को
रुस्वा
बात
को
समझो
ज़रा
ये
सफ़र
आसाँ
नहीं
है
तुम
बग़ावत
मत
करो
चाँद
भी
तो
रहता
तन्हा
बात
को
समझो
ज़रा
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