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Shivang Tiwari
main hijr ka maara hua hooñ isliye
main hijr ka maara hua hooñ isliye | मैं हिज्र का मारा हुआ हूँ इसलिए
- Shivang Tiwari
मैं
हिज्र
का
मारा
हुआ
हूँ
इसलिए
मुझको
दुआएँ
दे
दवाई
रहने
दे
- Shivang Tiwari
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एक
क़िस्मत
है
जो
लाती
है
ख़रीदार
मगर
एक
तक़दीर
है
सौदा
नहीं
होने
देती
Shivang Tiwari
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आज
हम
बरसों
पुरानी
में
कहीं
खो
गए
अपनी
कहानी
में
कहीं
अब
कहाँ
होंगी
वही
अटखेलियाँ
छोड़
आए
नाव
पानी
में
कहीं
जो
हसीं
घड़ियाँ
थीं
वो
छोड़
आए
हैं
बचपने
की
पासबानी
में
कहीं
ऐसी
खोई
अब
मिले
मुमकिन
नहीं
नींद
हमने
नौ-जवानी
में
कहीं
ज़िन्दगी
ने
ये
भी
दिन
दिखलाए
हैं
चल
पड़े
हैं
बे-ध्यानी
में
कहीं
पाँव
के
छाले
दिखाएँगे
शिवांग
गर
मिले
हम
ज़िन्दगानी
में
कहीं
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Shivang Tiwari
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तू
किसी
बज़्म
में
मिली
जब
से
शा'इरी
मैंने
की
शुरू
तब
से
याद
आई
तो
आँखें
धो
लूँगा
सोच
कर
मैं
भी
जग
रहा
शब
से
शा'इरी
मुझको
भी
कहाँ
आती
खेल
चलता
है
लब
के
करतब
से
इश्क़
है
काम
क्या
कहूँ
तुम
सेे
चैन
आता
है
उसके
ख़ुश-लब
से
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Shivang Tiwari
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ग़मों
से
चूर
होना
चाहता
हूँ
मैं
तुम
सेे
दूर
होना
चाहता
हूँ
मुझे
आसाइशें
दुख
दे
रही
हैं
ज़रा
मजबूर
होना
चाहता
हूँ
मज़ाहिब
का
निशाना
ले
लिया
है
ज़रा
मशहूर
होना
चाहता
हूँ
तुम्हारे
शहर
वालों
में
वफ़ा
का
कोई
दस्तूर
होना
चाहता
हूँ
मुझे
सादा-दिली
तड़पा
रही
है
ज़रा
मग़रूर
होना
चाहता
हूँ
अँधेरों
से
मेरा
रिश्ता
नहीं
है
मैं
अब
पुर-नूर
होना
चाहता
हूँ
जहाँ
भर
की
निगाहों
में
रहूँगा
मैं
कोह-ए-तूर
होना
चाहता
हूँ
ज़ियादा
कुछ
नहीं
माँगा
ख़ुदास
तेरा
सिंदूर
होना
चाहता
हूँ
ख़बर
तो
हो
मशक़्क़त
की
मुझे
भी
कोई
मज़दूर
होना
चाहता
हूँ
तुम्हारी
हाँ
मुझे
काफ़ी
नहीं
है
उसे
मंज़ूर
होना
चाहता
हूँ
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Shivang Tiwari
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दिल
की
चाहत
है
बस
ग़ज़ल
लिक्खूँ
मसअला
है
मगर
दो
रोटी
का
Shivang Tiwari
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