man qalam aur kaaghaz men khoya bahut | मन क़लम और काग़ज़ में खोया बहुत

  - Shivang Tiwari
मनक़लमऔरकाग़ज़मेंखोयाबहुत
रौशनाईमेंइनकोभिगोयाबहुत
हर्फ़बिखरेहुएथेतोमैंनेइन्हें
रात-दिनएककरके,पिरोयाबहुत
ज़रकमायानहींसिर्फ़लिखतारहा
इसलिएबोझतानोंकाढोयाबहुत
गीतग़ज़लोंमेंउलझाकरेगाभीक्या
जिसनेपायाहैकमऔरखोयाबहुत
  - Shivang Tiwari
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