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Shivang Tiwari
hooñ main naashaad to naashaad sahi
hooñ main naashaad to naashaad sahi | हूँ मैं नाशाद तो नाशाद सही
- Shivang Tiwari
हूँ
मैं
नाशाद
तो
नाशाद
सही
दिल
है
बर्बाद
तो
बर्बाद
सही
क्या
हुआ
तेरी
वफ़ा
साथ
नहीं
है
ये
उफ़्ताद
तो
उफ़्ताद
सही
क्या
करूँँ
इश्क़
है
तुझ
सेे
मेरी
जान
है
तू
शद्दाद
तो
शद्दाद
सही
मरने
तक
क़ैद
रहेगी
तेरी
याद
तू
है
आज़ाद
तो
आज़ाद
सही
कुछ
वजह
चाहिए
जीने
के
लिए
तू
नहीं
दिल
में
तेरी
याद
सही
- Shivang Tiwari
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देखिए
कैसी
बे-हयाई
है
ज़िन्दगी
मुझ
पे
मुस्कुराई
है
कितनी
उम्मीद
लेके
आई
है
मेरी
बेटी
मेरी
कमाई
है
बात
निकलेगी
तो
बढ़ेगी
ही
चुप
ही
रहने
में
अब
भलाई
है
क्या
करूँँ
कुछ
समझ
नहीं
आता,
है
कुआँ
आगे
पीछे
खाई
है।
फायदा
हो
रहा
किसी
का,
तो
झूठ
कहने
में
क्या
बुराई
है
जिसकी
ख़ातिर
मैं
छोड़
आया
सब
आज
उस
लड़की
की
सगाई
है
अब
नशा
उतरेगा
नहीं
जल्दी
उसने
आँखों
से
जो
पिलाई
है
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अधूरी
कहानी
कहे
जा
रहे
हो
किसे
याद
करके
मरे
जा
रहे
हो
कि
क्यूँ
रात
भर
जागते
हो
बताओ
कि
क्यूँ
ख़्वाब
दिन
में
बुने
जा
रहे
हो
अगर
ग़म
है
कोई
बता
दो
मुझे
तुम
अकेले
ही
ख़ुद
में
जले
जा
रहे
हो
जिन्हें
हाँ
मोहब्बत
हुई
ही
नहीं
थी
उन्हें
क्यूँ
क़सम
तुम
दिए
जा
रहे
हो
यही
बस
कहा
था
मोहब्बत
करो
तुम
अरे
यार
तुम
क्या
किए
जा
रहे
हो
इसी
जहर
को
तो
मिटाना
तुम्हें
था
मगर
तुम
इसे
ही
पिए
जा
रहे
हो
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Shivang Tiwari
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आसूदगी
को
ऐसे
बुलाना
पड़ा
मुझे
पर्दा
तुम्हारे
रुख़
से
हटाना
पड़ा
मुझे
जज़्बात-ओ-जोश
आतिश-ए-सय्याल
बन
गए
तिश्ना
लबों
से
इनको
बुझाना
पड़ा
मुझे
दामन
में
उसके
चाँद
सितारे
सजाने
को
अंबर
को
भी
ज़मीं
पे
झुकाना
पड़ा
मुझे
गुलशन
में
ये
महक
नहीं
ऐसे
ही
छा
गई
मुरझा
गई
कली
को
खिलाना
पड़ा
मुझे
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खिलते
रहे
हैं
फूल
मोहब्बत
के
नाम
पर
बोए
हैं
बीज
जब
भी
बग़ावत
के
नाम
पर
मिलने
को
रोज़
अब
भी
बुलाते
हैं
वो
मुझे
करते
हैं
इश्क़
लोग
शरारत
के
नाम
पर
काँटों
से
बैर
करके
गुलाबों
से
दोस्ती
खाओगे
ज़ख़्म
तुम
भी
हिफ़ाज़त
के
नाम
पर
उल्फ़त
का
क़त्ल
कर
दो
निगाहों
से
आज
तुम
धोखा-धड़ी
है
बिकती
शराफ़त
के
नाम
पर
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Shivang Tiwari
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दूरियाँ
दो
किनारों
सी
थी
क्या
दरमियाँ
दोनों
के
नदी
थी
क्या
राख
और
धुंध
की
तमन्ना
में
कोई
सिगरेट
जल
रही
थी
क्या
जिसने
ओढ़ा
है
लम्स
तेरा
उसे
लग
रहा
सर्द
जनवरी
थी
क्या
शब
उसे
देख
सुब्ह
सब
ने
कहा
कल
अमावस
में
चाँदनी
थी
क्या
क्यूँ
मुझे
मौत
जीनी
पड़
रही
है
इक
वही
लड़की
ज़िन्दगी
थी
क्या
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