अबफ़िक्रकेवजूदसेटकरागयाहूँमैं
करनेलगाहूँशा'इरीपगलागयाहूँमैं
लगनेलगाहैमनयेमेराज़िन्दगीमेंक्यूँ
येकौनसीख़ताकीसज़ापागयाहूँमैं
उसकेहसीनरुख़पेउदासीजवानहै
यानीमशक़्क़तोंसेभुलायागयाहूँमैं
लड़नापड़ामुझेदिएसाआफ़ताबसे
यानीतमामज़ीस्तसतायागयाहूँमैं
मैंख़ुशनुमासीरातकेसीनेकादर्दहूँ
सबकीहँसीकेपीछेछुपायागयाहूँमैं
यूँँकारवाँ-ए-ज़ीस्तमेंथासाथहरकोई
फिरभीक़ज़ाकेमोड़सेतन्हागयाहूँमैं