jis tarah ham hain zindagi ke baghair | जिस तरह हम हैं ज़िंदगी के बग़ैर

  - Shivam Raahi Badayuni
जिसतरहहमहैंज़िंदगीकेबग़ैर
कोईरहतानहींकिसीकेबगैर
हालअबपूछलेमिरातूभी
रोरहाहूँमैंख़ामुशीकेबग़ैर
अबकभीलौटकरनहींआना
जीनाआताहैअबसभीकेबग़ैर
छोड़जानाहैतोचलेजाएँ
कोईमरतानहींकिसीकेबग़ैर
रातयेज़िंदगीकीकबरुकेगी
कबसेरहतेहैंरौशनीकेबग़ैर
एकदिनलोगपूछहीलेंगे
कैसेरहतेहोशा'इरीकेबग़ैर
आपबसदफ़्नकरदेंमुझकोदोस्त
मरगयाहूँमैंख़ुद-कुशीकेबग़ैर
  - Shivam Raahi Badayuni
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy