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karan singh rajput
kya keejiye is zindagi ka hal nahin
kya keejiye is zindagi ka hal nahin | क्या कीजिए इस ज़िन्दगी का हल नहीं
- karan singh rajput
क्या
कीजिए
इस
ज़िन्दगी
का
हल
नहीं
अब
मौत
आ
जाए
तो
इस
सेे
अच्छा
क्या
- karan singh rajput
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हमारी
मौत
पर
बेशक़
ज़माना
आएगा
रोने
मगर
ज़िंदा
हैं
जब
तक
चैन
से
जीने
नहीं
देगा
Astitwa Ankur
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ज़िंदगी
दूर
ही
हमें
कर
दे
मौत
के
बाद
वस्ल
मुमकिन
है
Akash Panwar
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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हम
चाहते
थे
मौत
ही
हम
को
जुदा
करे
अफ़्सोस
अपना
साथ
वहाँ
तक
नहीं
हुआ
Waseem Nadir
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ज़िंदगी
फ़िरदौस-ए-गुम-गश्ता
को
पा
सकती
नहीं
मौत
ही
आती
है
ये
मंज़िल
दिखाने
के
लिए
Hafeez Jalandhari
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जन्नत
में
आ
गया
था
किसी
अप्सरा
पे
दिल
जिसकी
सज़ा-ए-मौत
में
दुनिया
मिली
मुझे
Ankit Maurya
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तुम्हारे
बाद
अब
मैं
क्या
करूँँगा
गुज़रती
गाड़ियाँ
देखा
करूँँगा
मेरे
मरने
पे
काफ़ी
लोग
होंगे
मैं
अपनी
मौत
पर
ख़र्चा
करूँँगा
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Asif Ali
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घर
से
निकले
थे
हौसला
कर
के
लौट
आए
ख़ुदा
ख़ुदा
कर
के
ज़िंदगी
तो
कभी
नहीं
आई
मौत
आई
ज़रा
ज़रा
करके
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Rajesh Reddy
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मौत
के
साथ
हुई
है
मिरी
शादी
सो
'ज़फ़र'
उम्र
के
आख़िरी
लम्हात
में
दूल्हा
हुआ
मैं
Zafar Iqbal
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मैं
आप
अपनी
मौत
की
तय्यारियों
में
हूँ
मेरे
ख़िलाफ़
आप
की
साज़िश
फ़ुज़ूल
है
Shahid Zaki
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वो
मेरे
साथ
ख़ुश
रहता
था
पर
कहता
नहीं
था
कुछ
बिछड़कर
मुझ
सेे
अब
उसको
भी
क्या
हासिल
हुआ
होगा
karan singh rajput
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हर
घड़ी
मैं
तो
हूँ
ना
मेरे
साथ
में
दोस्त
,
दुश्मन
,
जहाँ
,
तुम
,
ख़ुदा
ना
सही
karan singh rajput
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तुम्हें
देखकर
बिल्कुल
भी
ये
लगता
नहीं
तुम
इश्क़
में
पागल
होने
वाली
लड़की
हो
karan singh rajput
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याद
है
जब
हम
मिला
करते
थे
कितनी
बाते
किया
करते
थे
एक
दूजे
को
पकड़ा
करते
थे
बे
-
इजाजत
छुआ
करते
थे
तुम
बेंच
रोका
करती
थी
सुब्ह
फिर
साथ
में
बैठा
करते
थे
कितने
बे
-
बाक
हो
जाते
थे
हम
जब
एक
दूजे
को
देखा
करते
थे
नींद
आती
थी
उस
पेड़
के
नीचे
हाथ
पकड़कर
सोया
करते
थे
याद
है
तुमको
हँसाने
के
वास्ते
हम
बच्चों
जैसे
रोया
करते
थे
रोज़
क़स
में
तोड़ा
करते
थे
हम
रोज़
नया
वा'दा
लिया
करते
थे
याद
है
उस
टपरी
पे
बारिश
में
हम
ठंडी
चाय
पिया
करते
थे
मैं
तुमको
देखा
करती
थी
फिर
तुम
मुझ
सेे
नजरे
फेरा
करते
थे
मैं
छत
पर
सज
कर
खड़ती
थी
तुम
मेरी
गली
में
आया
करते
थे
मेरी
आँख
से
आँशु
गिरने
लगते
थे
जब
तुम
छोड़
के
जाया
करते
थे
मैं
तुमको
करन
पुकारा
करती
थी
तुम
मुझको
पागल
कहा
करते
थे
याद
है
जब
हम
मिला
करते
थे
कितनी
बाते
किया
करते
थे
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karan singh rajput
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पढ़ा
लिक्खा
तो
सब
कुछ
भूल
जाता
हूँ
मगर
हर
बात
उसकी
याद
रहती
है
karan singh rajput
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