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karan singh rajput
ki ham ik sikke ke do pahluu hai ai dost
ki ham ik sikke ke do pahluu hai ai dost | कि हम इक सिक्के के दो पहलू है ऐ दोस्त
- karan singh rajput
कि
हम
इक
सिक्के
के
दो
पहलू
है
ऐ
दोस्त
वो
नफ़रत
करता
है,
मैं
प्यार
करता
हूँ
- karan singh rajput
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मुझको
ये
मालूम
नहीं
था
तुम
सेे
मिलने
से
पहले
दोस्त
जल्दी
आँखें
भरने
वालों
के
मन
जल्दी
भर
जाते
हैं
Vikas Rana
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हालत
जो
हमारी
है
तुम्हारी
तो
नहीं
है
ऐसा
है
तो
फिर
ये
कोई
यारी
तो
नहीं
है
Ali Zaryoun
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हैराँ
मैं
भी
हूँ
दोस्त
यूँँ
बालों
में
गजरा
देखकर
ये
फूल
आख़िर
कबसे
फूलों
को
पहनने
लग
गया
Neeraj Neer
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मेरा
हर
दिन
तेरी
फ़ुर्क़त
में
बसर
होता
है
यार
होना
तो
नहीं
चाहिए,
पर
होता
है
Harman Dinesh
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बहुत
चल
बसे
यार
ऐ
ज़िंदगी
कोई
दिन
की
मेहमान
तू
रह
गई
Dagh Dehlvi
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सखी
को
हमारी
नज़र
लग
न
जाए
उसे
ख़्वाब
में
रात
भर
देखते
हैं
Sahil Verma
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बंद
कमरे
में
हज़ारों
मील
अब
चलते
हैं
हम
काफ़ी
महँगी
पड़
रही
है
शा'इरी
से
दोस्ती
Ashraf Jahangeer
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एक
सीता
की
रिफ़ाक़त
है
तो
सब
कुछ
पास
है
ज़िंदगी
कहते
हैं
जिस
को
राम
का
बन-बास
है
Hafeez Banarasi
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तुझे
कौन
जानता
था
मेरी
दोस्ती
से
पहले
तेरा
हुस्न
कुछ
नहीं
था
मेरी
शा'इरी
से
पहले
Kaif Bhopali
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यार
बिछड़कर
तुमने
हँसता
बसता
घर
वीरान
किया
मुझको
भी
आबाद
न
रक्खा
अपना
भी
नुक़्सान
किया
Ali Zaryoun
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क्या
सजा
पाई
है
तूने
और
मैंने
इश्क़
की
बिछड़े
फिर
भी
दोनो
जब
के
बावफ़ा
भी
थे
बहुत
karan singh rajput
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उस
सेे
बिछड़
कर
मैं
रोया
तमाम
रात
मत
पूछो
किस
तरह
सोया
तमाम
रात
karan singh rajput
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जुल्फे
यूँँ
ना
लहराया
करो
इतना
भी
ना
शरमाया
करो
मैं
जब
भाहों
में
भर
लूँ
तुम्हें
कुछ
देर
तो
मत
छुड़ाया
करो
जीन
भी
अच्छी
लगती
है
तुमपे
मुझ
सेे
मिलने
सूट
में
आया
करो
मैं
हर
रोज़
मनाता
हूँ
तुम्हें
ऐ
-
जाँ
कभी
ख़ुद
भी
मान
जाया
करो
कुछ
बाते
अपने
दरमियाँ
रखा
करो
हर
बात
सहेलियो
में
मत
बताया
करो
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karan singh rajput
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जिस्म
मैं
भी
जीत
सकता
था
तेरा
पर
सोचता
था
तू
ग़लत
न
समझें
मुझको
karan singh rajput
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कि
अपने
बीच
ऐसे
आती
है
तेरी
सहेली
इक
किसी
के
रस्ते
में
जैसे
कोई
दीवार
आती
है
karan singh rajput
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