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karan singh rajput
is tarah roothta hai vo ik dost
is tarah roothta hai vo ik dost | इस तरह रूठता है वो इक दोस्त
- karan singh rajput
इस
तरह
रूठता
है
वो
इक
दोस्त
जिस
तरह
लड़कियाँ
रूठती
हैं
- karan singh rajput
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क़फस
उदास
है
यारों
सबास
कुछ
तो
कहो
कहीं
तो
बहरे-खुदा
आज
ज़िक्र-ए-यार
चले
Faiz Ahmad Faiz
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मैं
दिल
को
सख़्त
करके
उस
गली
जा
तो
रहा
हूँ
दोस्त
करूँँगा
क्या
अगर
वो
ही
शरारत
पर
उतर
आया
Harsh saxena
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बहुत
चल
बसे
यार
ऐ
ज़िंदगी
कोई
दिन
की
मेहमान
तू
रह
गई
Dagh Dehlvi
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पहले
रूठा
यार
मनाना
होता
है
फिर
कोई
त्योहार
मनाना
होता
है
Hasan Raqim
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कब
लौटा
है
बहता
पानी
बिछड़ा
साजन
रूठा
दोस्त
हम
ने
उस
को
अपना
जाना
जब
तक
हाथ
में
दामाँ
था
Ibn E Insha
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यार
उसके
क़ीमती
तोहफ़े
तो
लाए
थे
बहुत
मैं
बरेली
का
था
मैंने
ला
के
झुमका
दे
दिया
Rudransh Trigunayat
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हैराँ
मैं
भी
हूँ
दोस्त
यूँँ
बालों
में
गजरा
देखकर
ये
फूल
आख़िर
कबसे
फूलों
को
पहनने
लग
गया
Neeraj Neer
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मुझ
सेे
पहले
कोई
रंग
लगाए
उनको
कैसे
सह
लें
यार
भला
ये
होली
में
हम
Priya Dixit
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एक
आवाज़
कि
जो
मुझको
बचा
लेती
है
ज़िन्दगी
आख़री
लम्हों
में
मना
लेती
है
जिस
पे
मरती
हो
उसे
मुड़
के
नहीं
देखती
वो
और
जिसे
मारना
हो
यार
बना
लेती
है
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Ali Zaryoun
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यार
बिछड़कर
तुमने
हँसता
बसता
घर
वीरान
किया
मुझको
भी
आबाद
न
रक्खा
अपना
भी
नुक़्सान
किया
Ali Zaryoun
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जिस
सेे
हुई
है
उसकी
शादी,
अच्छा
है
पर
मैं
ज़ियादा
अच्छा
था
उसके
लिए
karan singh rajput
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तुम
सेे
बिछड़
जाने
का
ख़याल
अच्छा
है
क्योंकि
अभी
मेरा
भी
हाल
अच्छा
है
उसने
पूछा
तुम्हें
कितनी
महोब्बत
है
मुझ
सेे
मैंने
कहा
मालूम
नहीं
सवाल
अच्छा
है
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karan singh rajput
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मुझको
तो
यूँँ
भी
अकेला
रहना
है
तुम
भी
जाना
चाहते
हो
ठीक
है
karan singh rajput
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तुझे
देखे
बिन
तो
दिखाई
न
दे
कुछ
मेरी
आँखों
को
तेरी
आदत
है
इतनी
कि
सर्दी
में
बाहर
निकल
के
करें
क्या?
तेरी
बाहों
में
जो
सहूलत
है
इतनी
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karan singh rajput
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सज़्दे
में
ना
दीदार
में
मारे
गए
राही
थे
हम
इंतज़ार
में
मारे
गए
हम
मौत
से
भी
मरने
वाले
थे
कहाँ
बस
ये
तो
तेरे
प्यार
में
मारे
गए
उसने
कभी
अपना
हमें
जाना
नहीं
जिसके
लिए
बेकार
में
मारे
गए
हम
सेे
मोहब्बत
तो
कभी
हो
ना
सकी
हम
तो
यूँँ
ही
तकरार
में
मारे
गए
उसकी
अदाएँ
ऐसी
थी
कुछ
जो
मेरे
जैसे
भी
पहली
बार
में
मारे
गए
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karan singh rajput
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