mire naseeb ka likkha badal bhi saktaa tha | मिरे नसीब का लिक्खा बदल भी सकता था

  - Shayar Jamali
मिरेनसीबकालिक्खाबदलभीसकताथा
वोचाहतातोमिरेसाथचलभीसकताथा
येतूनेठीककियाअपनाहाथखींचलिया
मिरेलबोंसेतिराहाथजलभीसकताथा
उड़ातीरहतीहैदुनियाग़लत-सलतबातें
वोसंग-दिलथातोइकदिनपिघलभीसकताथा
उतरगयातिराग़मरूहकीफ़ज़ाओंमें
रगोंमेंहोतातोआँखोंसेढलभीसकताथा
मैंठीकवक़्तपेख़ामोशहोगयावर्ना
मिरेरफ़ीक़ोंकालहजाबदलभीसकताथा
अनाकोधूपमेंरहनापसंदथावर्ना
तिरेग़ुरूरकासूरजतोढलभीसकताथा
रगड़सकीमिरीप्यासएड़ियाँवर्ना
हरएकज़र्रेसेचश्माउबलभीसकताथा
पसंदआईटूटीहुईफ़सीलकीराह
मैंशहर-ए-तनकीघुटनसेनिकलभीसकताथा
वोलम्हाजिसनेमुझेरेज़ा-रेज़ाकरडाला
किसीकेबसमेंजोहोतातोटलभीसकताथा
  - Shayar Jamali
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