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Sahir banarasi
gham hai uljhan hai tanhaaii hai
gham hai uljhan hai tanhaaii hai | ग़म है उलझन है तन्हाई है
- Sahir banarasi
ग़म
है
उलझन
है
तन्हाई
है
इस
सेे
अच्छा
तो
मर
ही
जाते
- Sahir banarasi
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आओ
होली
खेले
अब
हम
साँवरिया
राधा
रानी
को
भी
तुम
लेते
आना
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जाम
वो
होठ
से
लगाते
हैं
ग़म
से
जो
राब्ता
निभाते
हैं
हम
तो
वो
टूटे
दिल
के
शाइर
हैं
शा'इरी
में
सुने
जो
जाते
हैं
बात
ईमानदारी
की
है
अब
हम
न
खाते
न
ही
खिलाते
हैं
आज
वीरान
है
पड़ी
मस्जिद
ये
नमाज़ी
कहाँ
को
जाते
हैं
अब
रक़ीबों
में
चर्चे
हैं
काफ़ी
आपके
घर
हकीम
आते
हैं
छोड़
कैसे
मैं
देता
सिगरेट
को
वो
कहें
आज
हम
पिलाते
हैं
कर
ली
है
हमने
भी
मुहब्बत
अब
लोग
पागल
हमें
बताते
हैं
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Sahir banarasi
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दिल
से
उसकी
सारी
यादें
भुला
के
बैठा
इक
लड़का
सिगरेट
सुलगा
के
Sahir banarasi
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वो
पिघलती
रात
ही
कुछ
और
थी
उस
बदन
की
बात
ही
कुछ
और
थी
रात
भर
हम
करवटें
लेते
रहे
इश्क़
की
सौग़ात
ही
कुछ
और
थी
लड़ते
थे
दो
जिस्म
वो
इक
दूजे
से
जीत
क्या
वो
मात
ही
कुछ
और
थी
देखी
है
बारिश
कई
इन
नज़रों
ने
वो
मगर
बरसात
ही
कुछ
और
थी
ये
बरहमन
क्या
ही
'साहिर'
जानते
आशिक़ों
की
ज़ात
ही
कुछ
और
थी
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Sahir banarasi
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रात
हिज्र
में
गई
तो
दिन
शराब
में
गया
इश्क़
के
ये
रंग
भी
बड़े
कमाल
होते
हैं
Sahir banarasi
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