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shampa andaliib
vo manzar yaad kar ke sharm aa.e
vo manzar yaad kar ke sharm aa.e | वो मंज़र याद कर के शर्म आए
- shampa andaliib
वो
मंज़र
याद
कर
के
शर्म
आए
मेरे
झुमके
पे
तेरे
दिल
का
आना
- shampa andaliib
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है
देखने
वालों
को
सँभलने
का
इशारा
थोड़ी
सी
नक़ाब
आज
वो
सरकाए
हुए
हैं
Arsh Malsiyani
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चादर
की
इज़्ज़त
करता
हूँ
और
पर्दे
को
मानता
हूँ
हर
पर्दा
पर्दा
नइँ
होता
इतना
मैं
भी
जानता
हूँ
Ali Zaryoun
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किसी
के
झूठ
से
पर्दा
हटाकर
हमारा
सच
बहुत
रोया
था
उस
दिन
Shadab Asghar
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काबा
किस
मुँह
से
जाओगे
'ग़ालिब'
शर्म
तुम
को
मगर
नहीं
आती
Mirza Ghalib
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तसव्वुर
में
भी
अब
वो
बे-नक़ाब
आते
नहीं
मुझ
तक
क़यामत
आ
चुकी
है
लोग
कहते
हैं
शबाब
आया
Hafeez Jalandhari
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तू
इस
तरह
से
मिला
फिर
मलाल
भी
न
रहा
तेरे
ख़याल
में
अपना
ख़याल
भी
न
रहा
कुछ
इस
अदास
झुकी
थी
हया
से
आँख
तेरी
हमारी
आँख
में
कोई
सवाल
भी
न
रहा
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Subhan Asad
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लजा
कर
शर्म
खा
कर
मुस्कुरा
कर
दिया
बोसा
मगर
मुँह
को
बना
कर
Unknown
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जो
तेरी
बाँहों
में
हँसती
रही
है
खेली
है
वो
लड़की
राज़
नहीं
है
कोई
पहेली
है
हाँ
मेरा
हाथ
पकड़
कर
झटक
दिया
उसने
सहारा
दे
के
बताया
कि
तू
अकेली
है
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Tajdeed Qaiser
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वो
अपने
चेहरे
में
सौ
आफ़ताब
रखते
हैं
इसीलिए
तो
वो
रुख़
पे
नक़ाब
रखते
हैं
Hasrat Jaipuri
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ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
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Kazim Rizvi
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ज़िंदा
रखती
है
जिस
की
परछाई
एक
ऐसा
दरख़्त
है
माई
कैसे
उस
घर
में
ख़ुश
रहे
माई
भाई
से
लड़
रहा
जहाँ
भाई
बाद
मुद्दत
के
भर
रहे
हैं
ज़ख़्म
उम्र
गुज़री
तो
छट
रही
काई
रहनुमा
हो
गए
कहाँ
ओझल
मेरी
राहों
में
खोद
कर
खाई
तू
नहीं
है
ये
अब
हुआ
एहसास
मैं
अचानक
से
इस
तरफ़
आई
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shampa andaliib
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कुछ
नहीं
आज
तुझ
को
देने
को
सिर्फ़
सूखा
गुलाब
रक्खा
है
shampa andaliib
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तूफ़ाँ
से
जूझते
हुए
वहशत
में
आ
गए
फिर
यूँँ
जले
चराग़
कि
बस
आग
लग
गई
shampa andaliib
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फूल
इक
भी
नहीं
है
श्रद्धा
का
कैसे
मंदिर
का
तू
पुजारी
है
shampa andaliib
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सब
लोग
मेरे
अपने
मेरे
साथ
ही
तो
हैं
मुझ
को
इसी
फ़ितूर
ने
बर्बाद
कर
दिया
shampa andaliib
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