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Shakeb Jalali
Yahi deevar e judaai hai zamaane vaalo
यही दीवार-ए-जुदाई है ज़माने वालो
- Shakeb Jalali
यही
दीवार-ए-जुदाई
है
ज़माने
वालो
हर
घड़ी
कोई
मुक़ाबिल
में
खड़ा
रहता
है
- Shakeb Jalali
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कोई
इस
दिल
का
हाल
क्या
जाने
एक
ख़्वाहिश
हज़ार
तह-ख़ाने
मौत
ने
आज
ख़ुद-कुशी
कर
ली
ज़ीस्त
पर
क्या
बनी
ख़ुदा
जाने
फिर
हुआ
कोई
बद-गुमाँ
हम
से
फिर
जनम
ले
रहे
हैं
अफ़्साने
वक़्त
ने
ये
कहा
है
रुक
रुक
कर
आज
के
दोस्त
कल
के
बेगाने
दूर
से
एक
चीख़
उभरी
थी
बन
गए
बे-शुमार
अफ़्साने
ज़ीस्त
के
शोर-ओ-शर
में
डूब
गए
वक़्त
को
नापने
के
पैमाने
कितना
मुश्किल
है
मंज़िलों
का
हुसूल
कितने
आसाँ
हैं
जाल
फैलाने
राज़
ये
है
कि
कोई
राज़
नहीं
लोग
फिर
भी
मुझे
न
पहचाने
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Shakeb Jalali
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मुझे
गिरना
है
तो
मैं
अपने
ही
क़दमों
में
गिरूँ
जिस
तरह
साया-ए-दीवार
पे
दीवार
गिरे
Shakeb Jalali
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दिल
सा
अनमोल
रतन
कौन
ख़रीदेगा
'शकेब'
जब
बिकेगा
तो
ये
बे-दाम
ही
बिक
जाएगा
Shakeb Jalali
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आज
भी
शायद
कोई
फूलों
का
तोहफ़ा
भेज
दे
तितलियाँ
मंडला
रही
हैं
काँच
के
गुल-दान
पर
Shakeb Jalali
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पहले
तो
मेरी
याद
से
आई
हया
उन्हें
फिर
आइने
में
चूम
लिया
अपने-आप
को
Shakeb Jalali
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