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Shahzan Khan Shahzan'
mujhko afsos meri samt na tu laut sakaa
mujhko afsos meri samt na tu laut sakaa | मुझको अफ़सोस मेरी सम्त न तू लौट सका
- Shahzan Khan Shahzan'
मुझको
अफ़सोस
मेरी
सम्त
न
तू
लौट
सका
मैं
कि
देता
रहा
हर
बार
सदाएँ
तुझको
- Shahzan Khan Shahzan'
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भाँप
ही
लेंगे
इशारा
सर-ए-महफ़िल
जो
किया
ताड़ने
वाले
क़यामत
की
नज़र
रखते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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वो
तड़प
जाए
इशारा
कोई
ऐसा
देना
उस
को
ख़त
लिखना
तो
मेरा
भी
हवाला
देना
Azhar Inayati
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तुमको
क्या
मालूम
लोगों
ने
कहा
क्या
क्या
हमें
तुमने
तो
बस
लब
दबा
करके
इशारा
कर
दिया
Ashish Awasthi
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हल्की-हल्की
सी
हँसी,
साफ
इशारा
भी
नहीं
जान
भी
ले
गए
और,
जान
से
मारा
भी
नहीं
Sawan Shukla
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प्यार
करने
की
हिम्मत
नहीं
उनके
पास
और
हम
सेे
किनारा
भी
होता
नहीं
बात
सीधे
कही
भी
नहीं
जा
रही
और
कोई
इशारा
भी
होता
नहीं
उसको
उम्मीद
है
ऐश
होगी
बसर
साथ
में
जब
रहेगी
मिरे
वो
मगर
मुझपे
जितनी
मुहब्बत
बची
है
सखी
इतने
में
तो
गुज़ारा
भी
होता
नहीं
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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तुम
ने
किया
है
तुम
ने
इशारा
बहुत
ग़लत
दरिया
बहुत
दुरुस्त
किनारा
बहुत
ग़लत
Nabeel Ahmed Nabeel
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कोई
इशारा
दिलासा
न
कोई
वा'दा
मगर
जब
आई
शाम
तिरा
इंतिज़ार
करने
लगे
Waseem Barelvi
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मैं
साँसें
तक
लुटा
सकता
हूँ
उसके
इक
इशारे
पर
मगर
वो
मेरे
हर
वादे
को
सरकारी
समझता
है
Rahat Indori
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है
देखने
वालों
को
सँभलने
का
इशारा
थोड़ी
सी
नक़ाब
आज
वो
सरकाए
हुए
हैं
Arsh Malsiyani
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जो
उस
तरफ़
से
इशारा
कभी
किया
उस
ने
मैं
डूब
जाऊंगा
दरिया
को
पार
करते
हुए
Ghulam Murtaza Rahi
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बस
एक
शिकवा
है
तुम
सेे
के
मुझ
सेे
मिलने
कभी
हक़ीक़तों
में
नहीं
ख़्वाब
में
तो
आना
था
Shahzan Khan Shahzan'
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उदासी
चीख़
कर
ये
बोलती
है
तू
आख़िर
कब
तलक
मातम
करेगा?
Shahzan Khan Shahzan'
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रहना
पड़ता
है
उदासी
के
नगर
में
हमको
तब
कहीं
जाके
ये
अश'आर
हुआ
करते
हैं
Shahzan Khan Shahzan'
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तू
वापस
लौट
कर
आए
न
आए
ये
दरिया
हर
समय
बहता
मिलेगा
Shahzan Khan Shahzan'
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मुझको
अपना
बना
गया
कोई
ज़ख़्म
फिर
से
दुखा
गया
कोई
इसको
अपनी
बता
के
जादूगरी
तेरी
आँखें
बना
गया
कोई
हुस्न
वालों
की
एक
महफ़िल
में
मेरी
आँखों
को
भा
गया
कोई
एक
दुनिया
थी
ख़ुशबुओं
जैसी
उसके
धोखे
में
आ
गया
कोई
देर
तक
सोचता
रहा
तुमको
शे'र
ऐसा
सुना
गया
कोई
अपनी
यादों
के
रतजगे
देकर
मेरी
मुस्कान
खा
गया
कोई
इक
त'अल्लुक़
जो
मेरी
दुनिया
था
उसको
जड़
से
मिटा
गया
कोई
चाल
ऐसी
चली
गई
शहज़ान
हारी
बाज़ी
जिता
गया
कोई
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Shahzan Khan Shahzan'
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