roz do chaar log aate hai | रोज़ दो चार लोग आते है

  - Shahzan Khan Shahzan'
रोज़दोचारलोगआतेहै
उसकीआँखोंकेगीतगातेहैं
मैंउदासीकाएकमंज़रहूँ
मुझसेेमिलकरयेचैनपातेहैं
रातबादलसितारेग़मआँसू
सबमेराहौसलाबढ़ातेहैं
तेरीतस्वीरकुछनहींकहती
बसतेरेहोंठमुस्कुरातेहैं
किसकोबोलूँउदासलम्होंमें
वोमुझेख़ूबयादआतेहैं
इश्क़दुनियाकीआख़िरीहदहै
औरसबइस
मेंडूबजातेहैं
एकपलभीअगरमैंहँसलूँतो
लोगकितनामुझेरुलातेहैं
मेरीतन्हाईदेखकरशहज़ान
रास्तेक़हक़हालगातेहैं
  - Shahzan Khan Shahzan'
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