कनार-ए-चश्म से देखा है ख़ौफ़ खाते हुए

  - Shahzad Nayyar
कनार-ए-चश्मसेदेखाहैख़ौफ़खातेहुए
लरज़तीडोलतीदुनियाकोडूबजातेहुए
किसीनेहमसेपूछाहमारेख़्वाबकारंग
येरंगरंगकेपरचमहमेंथमातेहुए
हैशोर-ख़ाना-ए-दुनियागलीकेनुक्कड़पर
मैंकानबंदहीरखताहूँआते-जातेहुए
कोईतोकेख़बरलेकिबुझताजाताहै
फ़क़ीरशबकेअँधेरेमेंदिनमिलातेहुए
तुम्हारेपाँवजमेंहैंसोतुमसमझोगे
हयातकैसेगुज़रतीहैलड़खड़ातेहुए
भलाहोमाह-ए-मुहब्बतकीनूर-पाशीका
हमऐसेलोगभीजीतेहैंजगमगातेहुए
मैंदर्द-ए-हिज्रकीशिद्दतसेख़ूबवाक़िफ़हूँ
सोआसरातुम्हेंदेताहूँडगमगातेहुए
कभी-कभारसड़कपरमैंख़ुदसेमिलताहूँ
किसीकोछोड़केआतेकिसीकोलातेहुए
  - Shahzad Nayyar
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