apni tasveer ko aankhoñ se lagata kya hai | अपनी तस्वीर को आँखों से लगाता क्या है

  - Shahzad Ahmad
अपनीतस्वीरकोआँखोंसेलगाताक्याहै
इकनज़रमेरीतरफ़भीतिराजाताक्याहै
मेरीरुस्वाईमेंवोभीहैंबराबरकेशरीक
मेरेक़िस्सेमिरेयारोंकोसुनाताक्याहै
पासरहकरभीपहचानसकातूमुझको
दूरसेदेखकेअबहाथहिलाताक्याहै
ज़ेहनकेपर्दोंपेमंज़िलकेहयूलेबना
ग़ौरसेदेखताजाराहमेंआताक्याहै
ज़ख़्म-ए-दिलजुर्मनहींतोड़भीदेमोहर-ए-सुकूत
जोतुझेजानतेहैंउनसेछुपाताक्याहै
सफ़र-ए-शौक़मेंक्यूँँकाँपतेहैंपाँवतिरे
आँखरखताहैतोफिरआँखचुराताक्याहै
उम्रभरअपनेगरेबाँसेउलझनेवाले
तूमुझेमेरेहीसाएसेडराताक्याहै
चाँदनीदेखकेचेहरेकोछुपानेवाले
धूपमेंबैठकेअबबालसुखाताक्याहै
मरगएप्यासकेमारेतोउठाअब्र-ए-करम
बुझगईबज़्मतोअबशम्अजलाताक्याहै
मैंतिराकुछभीनहींहूँमगरइतनातोबता
देखकरमुझकोतिरेज़ेहनमेंआताक्याहै
तेराएहसासज़रासातिरीहस्तीपायाब
तोसमुंदरकीतरहशोरमचाताक्याहै
तुझमेंकस-बलहैतोदुनियाकोबहाकरलेजा
चायकीप्यालीमेंतूफ़ानउठाताक्याहै
तेरीआवाज़काजादूचलेगाउनपर
जागनेवालोंको'शहज़ाद'जगाताक्याहै
  - Shahzad Ahmad
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