ज़र-ए-सरिश्कफ़ज़ामेंउछालताहुआमैं
बिखरचलाहूँख़ुशीकोसँभालताहुआमैं
अभीतोपहलेपरोंकाभीक़र्ज़हैमुझपर
झिजकरहाहूँनएपरनिकालताहुआमैं
किसीजज़ीरा-ए-पुर-अम्नकीतलाशमेंहूँ
ख़ुदअपनीराखसमुंदरमेंडालताहुआमैं
फलोंकेसाथकहींघोंसलेनगिरजाएँ
ख़यालरखताहूँपत्थरउछालताहुआमैं
येकिसबुलंदीपेलाकरखड़ाकियाहैमुझे
किथकगयाहूँतवाज़ुनसँभालताहुआमैं
वोआगफैलीतोसबकुछसियाहराखहुआ
किसोगयाथाबदनकोउजालताहुआमैं
बिछड़गयाहूँख़ुदअपनेमक़ामसे'शाहिद'
भटकनेवालोंकोरस्तेपेडालताहुआमैं