हवा की डोर में टूटे हुए तारे पिरोती है

  - Shahid Kamal
हवाकीडोरमेंटूटेहुएतारेपिरोतीहै
येतन्हाईअजबलड़कीहैसन्नाटेमेंरोतीहै
मोहब्बतमेंलगारहताहैअंदेशाजुदाईका
किसीकेरूठजानेसेकमीमहसूसहोतीहै
ख़मोशीकीक़बापहनेहैमहव-ए-गुफ़्तुगूकोई
बरहनाजिस्मतन्हाईमिरेपहलूमेंसोतीहै
येआँखेंरोज़अपनेआँसुओंकेसुर्ख़रेशमसे
नयाकुछख़्वाबबुनतीहैकोईसपनासँजोतीहै
लहूमेंतैरनेलगताहैजबवोचाँदसाचेहरा
हवा-ए-दर्दसीनेमेंकोईनेज़ाचुभोतीहै
येशहर-ए-रफ़्तगाँहैअबयहाँकोईनहींआता
येकिसकेपावँकीआहटमुझेमहसूसहोतीहै
बुरीदा-सरपड़ाहैकुश्ता-ए-उम्मीदसहरामें
उदासीख़ाकपरबैठीहुईआँचलभिगोतीहे
  - Shahid Kamal
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