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Sayeed Khan
us be-vafa ka karte ho tum zikr baar baar
us be-vafa ka karte ho tum zikr baar baar | उस बे-वफ़ा का करते हो तुम ज़िक्र बार बार
- Sayeed Khan
उस
बे-वफ़ा
का
करते
हो
तुम
ज़िक्र
बार
बार
आदत
'सईद'
है
ये
तुम्हारी
बहुत
बुरी
- Sayeed Khan
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तू
इस
तरह
से
मिरे
साथ
बे-वफ़ाई
कर
कि
तेरे
बाद
मुझे
कोई
बे-वफ़ा
न
लगे
Qaisar-ul-Jafri
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लो
फिर
तिरे
लबों
पे
उसी
बे-वफ़ा
का
ज़िक्र
अहमद-'फ़राज़'
तुझ
से
कहा
ना
बहुत
हुआ
Ahmad Faraz
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नज़र
न
आए
मुझे
हुस्न
के
सिवा
कुछ
भी
वो
बे-वफ़ा
भी
अगर
है
तो
बे-वफ़ा
न
लगे
Hasan naim
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मुझ
को
न
दिल
पसंद
न
वो
बे-वफ़ा
पसंद
दोनों
हैं
ख़ुद-ग़रज़
मुझे
दोनों
हैं
ना-पसंद
Bekhud Dehelvi
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सर
झुकाओगे
तो
पत्थर
देवता
हो
जाएगा
इतना
मत
चाहो
उसे
वो
बे-वफ़ा
हो
जाएगा
Bashir Badr
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सुना
है
हमें
बे-वफ़ा
तुम
कहो
हो
ज़रा
हम
से
आँखें
मिला
लो
तो
जानें
Kaleem Aajiz
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आँखों
की
नींद
दोनों
तरह
से
हराम
है
उस
बे-वफ़ा
को
याद
करें
या
भुलाएँ
हम
Nazeer Banarasi
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मैं
तेरे
बाद
कोई
तेरे
जैसा
ढूँढता
हूँ
जो
बे-वफ़ाई
करे
और
बे-वफ़ा
न
लगे
Abbas Tabish
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किसी
बे-वफ़ा
से
बिछड़
के
तू
मुझे
मिल
गया
भी
तो
क्या
हुआ
मेरे
हक़
में
वो
भी
बुरा
हुआ
मेरे
हक़
में
ये
भी
बुरा
हुआ
Mumtaz Naseem
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सारे
का
सारा
तो
मेरा
भी
नहीं
और
वो
शख़्स
बे-वफ़ा
भी
नहीं
ग़ौर
से
देखने
पे
बोली
है
शादी
से
पहले
सोचना
भी
नहीं
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Kushal Dauneria
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उसको
इज़्ज़त
के
ख़ौफ़
ने
रोका
वरना
वो
भाग
जाती
मेरे
साथ
Sayeed Khan
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वो
बहुत
ही
हसीन
है
तो
क्या
दिल
पे
मेरे
मकीन
है
तो
क्या
ज़िंदगी
ऐश
से
जिएँगे
हम
आख़िरी
मौत
सीन
है
तो
क्या
ख़ूब-सूरत
बदन
नहीं
उसका
वो
बहुत
ही
ज़हीन
है
तो
क्या
कौन
बोला
है
बोलने
को
सच
झूठ
पे
जब
यक़ीन
है
तो
क्या
इश्क़
तो
चाहता
बदन
है
बस
जब
बदन
अंगबीन
है
तो
क्या
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Sayeed Khan
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शुक्र
है
अल्लाह
का
जो
आ
गया
सब्र
वरना
इक
दिन
तर्क
हम
इस्लाम
करते
Sayeed Khan
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जैसे
उदास
करने
मुझे
आई
ईद
हो
तेरे
बगैर
कैसी
मिरी,
माई
ईद
हो
Sayeed Khan
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ज़ब्त
करने
में
है
समझदारी
और
कुछ
बोलना
है
मक्कारी
इतना
ज़्यादा
रहा
हूँ
मैं
बीमार
की
मेरी
मौत
से
भी
है
यारी
ये
दवा
ये
दु'आ
के
हैं
असरात
साँस
लेना
भी
जिस
सेे
है
भारी
काम
मुश्किल
बहुत
है
ये
करना
सब
सेे
खु़श
रहने
की
अदाकारी
एक
तेरे
सिवा
मेरा
है
कौन
किस
की
है
और
दिल
पे
सरदारी
अब
जियोगे
सईद
कैसे
तुम
हिज्र
और
उस
पर
एक
बीमारी
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Sayeed Khan
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