ढूँडते ढूँडते ख़ुद को मैं कहाँ जा निकला

  - Sarwar Alam Raz
ढूँडतेढूँडतेख़ुदकोमैंकहाँजानिकला
एकपर्दाजोउठादूसरापर्दानिकला
मंज़र-ए-ज़ीस्तसरासरतह-ओ-बालानिकला
ग़ौरसेदेखातोहरशख़्सतमाशानिकला
एकहीरंगकाग़म-ख़ाना-ए-दुनियानिकला
ग़म-ए-जानाँभीग़म-ए-ज़ीस्तकासायानिकला
इसरह-ए-ज़ीस्तकोहमअजनबीसमझेथेमगर
जोभीपत्थरमिलाबरसोंकाशनासानिकला
आरज़ूहसरतऔरउम्मीदशिकायतआँसू
इकतेराज़िक्रथाऔरबीचमेंक्याक्यानिकला
घरसेनिकलेथेकिआईनादिखाएँसबको
लेकिनहरअक्समेंअपनाहीसरापानिकला
क्यूँँहमभीकरेंउसनक़्श-ए-कफ़-ए-पाकीतलाश
शोला-ए-तूरभीतोएकबहानानिकला
जीमेंथाबैठकेकुछअपनीकहेंगे'सरवर'
तूभीकम-बख़्तज़मानेकासतायानिकला
  - Sarwar Alam Raz
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