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Sarvjeet Singh
ab kisi bhi baat ka dar hi nahin hai
ab kisi bhi baat ka dar hi nahin hai | अब किसी भी बात का डर ही नहीं है
- Sarvjeet Singh
अब
किसी
भी
बात
का
डर
ही
नहीं
है
अब
मुझे
हर
बात
से
डर
लग
रहा
है
- Sarvjeet Singh
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मुझे
ये
डर
है
तेरी
आरज़ू
न
मिट
जाए
बहुत
दिनों
से
तबीअत
मिरी
उदास
नहीं
Nasir Kazmi
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नई
सुब्ह
पर
नज़र
है
मगर
आह
ये
भी
डर
है
ये
सहर
भी
रफ़्ता
रफ़्ता
कहीं
शाम
तक
न
पहुँचे
Shakeel Badayuni
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अब
तो
उस
सूने
माथे
पर
कोरेपन
की
चादर
है
अम्मा
जी
की
सारी
सजधज,
सब
ज़ेवर
थे
बाबूजी
कभी
बड़ा
सा
हाथ
ख़र्च
थे
कभी
हथेली
की
सूजन
मेरे
मन
का
आधा
साहस,
आधा
डर
थे
बाबूजी
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Aalok Shrivastav
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जैसे
ग़लत
पते
पे
चला
आए
कोई
शख़्स
सुख
ऐसे
मेरे
दर
पे
रुका
और
गुज़र
गया
Rajesh Reddy
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हुस्न
ने
शौक़
के
हंगा
में
तो
देखे
थे
बहुत
इश्क़
के
दावा-ए-तक़दीस
से
डर
जाना
था
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Asrar Ul Haq Majaz
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फ़ुर्सत
नहीं
मुझे
कि
करूँँ
इश्क़
फिर
से
अब
माज़ी
की
चोटों
से
अभी
उभरा
नहीं
हूँ
मैं
डर
है
कहीं
ये
ऐब
उसे
रुस्वा
कर
न
दे
सो
ग़म
में
भी
शराब
को
छूता
नहीं
हूँ
मैं
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Harsh saxena
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हम
मिल
के
आ
गए
मगर
अच्छा
नहीं
लगा
फिर
यूँँ
हुआ
असर
कि
घर
अच्छा
नहीं
लगा
इक
बार
दिल
में
तुझ
सेे
जुदाई
का
डर
बना
फिर
दूसरा
कोई
भी
डर
अच्छा
नहीं
लगा
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Shriyansh Qaabiz
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मैं
बार
बार
तुझे
देखता
हूॅं
इस
डर
से
कि
पिछली
बार
का
देखा
हुआ
ख़राब
न
हो
Shaheen Abbas
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गुज़ार
देते
हैं
रातें
पहलू
में
उसके
जुगनू
को
भी
दर
का
फ़क़ीर
बना
रखा
है
ALI ZUHRI
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दीवार-ओ-दर
पे
'कृष्णा'
की
लीला
के
नक़्श
है
मंदिर
है
ये
तो
'कृष्ण'
के
दरबार
की
तरह
Shobha Kukkal
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कैसे
आगे
बढ़
पाता
हम
दोनों
का
ये
रिश्ता
जानाँ
हम
से
करनी
थी
जो
बातें
तुम
ने
कर
ली
और
किसी
से
Sarvjeet Singh
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उन
लम्हों
को
भूल
न
जाना
उन
वादों
को
भूल
न
जाना
उन
अपनों
के
आने
पर
फिर
इन
अपनों
को
भूल
न
जाना
अपना
काम
निकल
जाने
पर
फिर
रिश्तों
को
भूल
न
जाना
वो
जो
दुख
में
साथ
खड़े
थे
उन
लोगों
को
भूल
न
जाना
मंज़िल
के
मिल
जाने
पर
तुम
इन
रस्तों
को
भूल
न
जाना
दो
पल
की
ख़ुशियाँ
मिलने
पर
'सर्व'
ग़मों
को
भूल
न
जाना
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Sarvjeet Singh
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वो
जब
मिलने
आएँगे
तो
ऐसा
करके
देखेंगे
पानी
ना
अब
उनके
आगे
पैसा
करके
देखेंगे
उन
सेे
उनकी
भाषा
में
ही
बात
करेंगे
अबके
हम
एक
दफ़ा
ख़ुद
को
भी
उनके
जैसा
करके
देखेंगे
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Sarvjeet Singh
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न
बन
अनजान
इतना
आज
जल्दी
आसमाँ
में
आ
कि
थोड़ा
तो
तरस
कर
चाँद
मेरा
चाँद
भूखा
है
Sarvjeet Singh
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बिछड़ते
वक़्त
मैं
रोया
नहीं
बिल्कुल
मुझे
मालूम
था
जल्दी
मिलेंगें
हम
Sarvjeet Singh
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