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Sarvjeet Singh
is dil ka aalam likhta hooñ
is dil ka aalam likhta hooñ | इस दिल का आलम लिखता हूँ
- Sarvjeet Singh
इस
दिल
का
आलम
लिखता
हूँ
पर
अब
काफ़ी
कम
लिखता
हूँ
लिखने
को
है
कितना
कुछ
पर
क्यूँँ
फिर
बस
मैं
ग़म
लिखता
हूँ
तेरे
हँसते
लब
लिखने
को
अपनी
आँखें
नम
लिखता
हूँ
जब
छा
जाती
है
तन्हाई
बीयर
व्हिस्की
रम
लिखता
हूँ
ख़्वाबों
की
बस्ती
है
जिस
में
मैं
और
तुम
को
हम
लिखता
हूँ
- Sarvjeet Singh
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उस
सेे
पहले
भी
क्या
मुझको
ज़्यादा
हासिल
था
वो
आँखों
का
धोखा
था
जो
समझा
साहिल
था
वैसे
उसकी
सूरत
अब
कुछ
ज़्यादा
याद
नहीं
पर
इतना
मालूम
कि
ठोड़ी
पर
उसकी
तिल
था
ना
जाने
कैसे
ये
मेरी
धड़कन
चलती
है
उसने
मुझको
लौटाया
ही
ना
मेरा
दिल
था
मेरी
नज़रों
में
बाकी
सारा
जग
दोषी
है
बस
उस
पर
इल्ज़ाम
नहीं
जो
सच
में
क़ातिल
था
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इस
बार
तो
लगता
हमें
बस
ग़म
मिलेंगे
इक
ख़्वाब
ही
तो
है
ये
के
जानम
मिलेंगे
अगले
जनम
में
ना
मुझे
विश्वास
वैसे
पर
मान
लेता
हूँ
कि
उस
में
हम
मिलेंगे
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Sarvjeet Singh
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मन
करता
है
उसका
तो
दिल
की
बतलाने
लगता
है
और
कभी
फिर
मुझ
सेे
हफ़्तों-हफ़्तों
बात
नहीं
करता
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अब
इस
दुनिया
से
क्या
लेना,मैं
तो
उसकी
बाँहों
में
हूँ
कौन
कहाँ
किसका
कैसा
क्या,मैं
तो
उसकी
बाँहों
में
हूँ
बाहर
इतना
शोर
मचा
है
आज
बड़ी
सर्दी
है,तो
फिर
मुझको
क्यूँ
नईं
लगती
अच्छा,मैं
तो
उसकी
बाँहों
में
हूँ
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उन
लम्हों
को
भूल
गए
तुम
उन
वादों
को
भूल
गए
तुम
उन
अपनों
के
आने
पर
फिर
इन
अपनों
को
भूल
गए
तुम
अपना
काम
निकल
जाने
पर
फिर
रिश्तों
को
भूल
गए
तुम
सारी
दुनिया
याद
रही
पर
कुछ
लोगों
को
भूल
गए
तुम
ऐसी
भी
क्या
मजबूरी
थी
जो
सपनों
को
भूल
गए
तुम
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Sarvjeet Singh
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