दश्त में है एक नक़्श-ए-रहगुज़र सब से अलग

  - Sarmad Sahbai
दश्तमेंहैएकनक़्श-ए-रहगुज़रसबसेअलग
हममेंहैशायदकोईमहव-ए-सफ़रसबसेअलग
चलतेचलतेवोभीआख़िरभीड़मेंगुमहोगया
वोजोहरसूरतमेंआताथानज़रसबसेअलग
सबकीअपनीमंज़िलेंथींसबकेअपनेरास्ते
एकआवाराफिरेहमदर-ब-दरसबसेअलग
हैरह-ओ-रस्म-ए-ज़मानापर्दा-ए-बेगानगी
दरमियाँरहताहूँमैंसबकेमगरसबसेअलग
देकेआदतरंजकीहोताहैमुझपरमेहरबाँ
उससितमगरनेयेसीखाहैहुनरसबसेअलग
शहर-ए-कसरतमेंअजबइकरौज़न-ए-ख़ल्वतखुला
उसनेजोदेखामुझेइकलम्हाभरसबसेअलग
हरकोईशामिलहुआ'सरमद'जुलूस-ए-आममें
मुँहउठाएचलदियाहैतूकिधरसबसेअलग
  - Sarmad Sahbai
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