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Sanskar 'Sanam'
palatkar dekhna mujhko tumhaara
palatkar dekhna mujhko tumhaara | पलटकर देखना मुझको तुम्हारा
- Sanskar 'Sanam'
पलटकर
देखना
मुझको
तुम्हारा
जुदाई
और
मुश्किल
कर
रहा
है
तेरी
आँखों
को
पढ़ना
जानता
हूँ
ठहरने
का
तेरा
दिल
कर
रहा
है
- Sanskar 'Sanam'
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बता
रहा
है
झटकना
तेरी
कलाई
का
ज़रा
भी
रंज
नहीं
है
तुझे
जुदाई
का
मैं
ज़िंदगी
को
खुले
दिल
से
खर्च
करता
था
हिसाब
देना
पड़ा
मुझको
पाई-पाई
का
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Azhar Faragh
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आई
होगी
किसी
को
हिज्र
में
मौत
मुझ
को
तो
नींद
भी
नहीं
आती
Akbar Allahabadi
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वो
एक
शख़्स
जो
दिखने
में
ठीक-ठाक
सा
था
बिछड़
रहा
था
तो
लगने
लगा
हसीन
बहुत
Siraj Faisal Khan
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थी
वस्ल
में
भी
फ़िक्र-ए-जुदाई
तमाम
शब
वो
आए
तो
भी
नींद
न
आई
तमाम
शब
Momin Khan Momin
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हिज्र
में
अब
वो
रात
हुई
है
जिस
में
मुझको
ख़्वाबों
में
रेल
की
पटरी,
चाकू,
रस्सी,
बहती
नदियाँ
दिखती
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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क्यूँ
हिज्र
के
सभी
को
क़िस्से
सुना
रहे
हो
ग़म
बेचते
हो
सबको
ग़म
की
दुकान
हो
तुम
Amaan Pathan
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तू
परिंदा
है
किसी
शाख़
को
घर
कर
लेगा
जो
तेरे
हिज्र
का
मारा
है
किधर
जाएगा
Shadab Javed
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नाम
पे
हम
क़ुर्बान
थे
उस
के
लेकिन
फिर
ये
तौर
हुआ
उस
को
देख
के
रुक
जाना
भी
सब
से
बड़ी
क़ुर्बानी
थी
मुझ
से
बिछड़
कर
भी
वो
लड़की
कितनी
ख़ुश
ख़ुश
रहती
है
उस
लड़की
ने
मुझ
से
बिछड़
कर
मर
जाने
की
ठानी
थी
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Jaun Elia
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रेल
की
सीटी
में
कैसे
हिज्र
की
तम्हीद
थी
उसको
रुख़्सत
करके
घर
लौटे
तो
अंदाज़ा
हुआ
Parveen Shakir
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तुम्हारा
बैग
भी
तय्यार
कर
के
रक्खा
है
अकेली
हिज्र
के
आज़ार
क्यूँ
उठाऊँ
मैं
Zahraa Qarar
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अपनी
माँ
को
अपनी
माँ
की
ख़ातिर
रोता
देखा
है
मैं
भी
अपनी
माँ
की
ख़ातिर
थोड़ा
रोना
चाहता
हूँ
Sanskar 'Sanam'
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उनके
आँसू
पर
भी
लानत
होती
है
क्यूँ
रोने
से
रोके
जाते
हैं
लड़के
Sanskar 'Sanam'
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तेरी
ख़ातिर
सारे
जग
से
लड़
सकता
हूँ
मैं
लेकिन
तुझ
सेे
लड़
सकता
हूँ
मैं
माँ
की
ख़ातिर
Sanskar 'Sanam'
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रोने
का
कारण
क्या
होगा
तेरा
दिल
भी
दुखता
होगा
जिसके
कंधे
पर
रोई
हो
वो
भी
तुमपर
मरता
होगा
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Sanskar 'Sanam'
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मांडवी
का
त्याग
भी
छोटा
नहीं
था
थीं
भरत
के
पास
लेकिन
दूर
थीं
वो
Sanskar 'Sanam'
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