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Sanjay shajar
yuñ thappad zindagi men sab ne maara par
yuñ thappad zindagi men sab ne maara par | यूँँ थप्पड़ ज़िन्दगी में सब ने मारा पर
- Sanjay shajar
यूँँ
थप्पड़
ज़िन्दगी
में
सब
ने
मारा
पर
गरीबी
का
बहुत
ही
हाथ
भारी
था
- Sanjay shajar
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पहली
ग़लती
पर
मत
छोड़ो
मुझको
तुम
पहली
रोटी
गोल
नहीं
बनती
जानाँ
Tanoj Dadhich
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मिलना
हमारा
कम
हुआ
फिर
बात
कम
हुई
क़िस्तों
में
मुझ
ग़रीब
की
ख़ैरात
कम
हुई
Bhawana Srivastava
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ये
टूटी
चटाई
ये
मिटटी
का
बर्तन
हिकारत
से
नादान
क्या
देखता
है
गरीबी
मोहम्मद
के
घर
में
पली
है
मेरे
घर
का
सामान
क्या
देखता
है
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Anjuman rahi raza
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ग़रीब
लोग
कहाँ
ख़ुद
को
बचा
पाएँगे
वबास
बच
भी
गए
भूख
से
मर
जाएँगे
Astitwa Ankur
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न
जाने
कौन
सी
दौलत
अता
करता
है
रब
इनको
किसी
भी
बाप
को
मुफ़्लिस
कभी
देखा
नहीं
मैंने
Saheb Shrey
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सच
की
डगर
पे
जब
भी
रक्खे
क़दम
किसी
ने
पहले
तो
देखी
ग़ुर्बत
फिर
तख़्त-ओ-ताज
देखा
Amaan Pathan
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ये
तेरे
ख़त
ये
तेरी
ख़ुशबू
ये
तेरे
ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ
हैं
तेरे
कौल
और
क़सम
की
तरह
गुज़िश्ता
साल
मैंने
इन्हें
गिनकर
रक्खा
था
किसी
ग़रीब
की
जोड़ी
हुई
रक़म
की
तरह
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Jaun Elia
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सुनते
हैं
इश्क़
नाम
के
गुज़रे
हैं
इक
बुज़ुर्ग
हम
लोग
भी
फ़क़ीर
इसी
सिलसिले
के
हैं
Firaq Gorakhpuri
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मुफ़लिसी
थी
और
हम
थे
घर
के
इकलौते
चराग़
वरना
ऐसी
रौशनी
करते
कि
दुनिया
देखती
Kashif Sayyed
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धूप
पड़े
उस
पर
तो
तुम
बादल
बन
जाना
अब
वो
मिलने
आए
तो
उसको
घर
ठहराना।
तुमको
दूर
से
देखते
देखते
गुज़र
रही
है
मर
जाना
पर
किसी
गरीब
के
काम
न
आना।
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Tehzeeb Hafi
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जाने
किस
सोच
में
डूबे
गुज़रे
हम
किसी
शय
को
न
छू
के
गुज़रे
अब
वो
ख़ुद
हम
से
गुज़र
जाती
है
हम
कि
इक
राह
से
इतने
गुज़रे
सोचकर
ये
तू
पकड़
ले
शायद
हम
तेरा
हाथ
भी
छू
के
गुज़रे
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Sanjay shajar
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गए
हैं
आप
जैसे
वैसे
जाया
भी
नहीं
जाता
भुलाते
फिर
रहे
हैं
हम
भुलाया
भी
नहीं
जाता
Sanjay shajar
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एक
है
तीर
इक
निशाना
है
एक
ही
बार
में
लगाना
है
छूटते
ही
ये
जान
जाओगे
जान
लेना
ही
छूट
जाना
है
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Sanjay shajar
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थक
गया
हूँ
ख़ुदस
चल
सकता
नहीं
अब
इस
सेे
आगे
ज़िन्दगी
ले
चल
मुझे
तू
Sanjay shajar
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किसी
के
ग़म
में
पागल
हो
गई
हैं
हमारी
आँखें
बादल
हो
गई
हैं
फ़लक
से
कोई
चारा-गर
उतारो
ज़मीं
पर
रूहें
घाइल
हो
गई
हैं
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Sanjay shajar
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