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Sanjay shajar
maine tumhein pahle kabhi dekha hai kya
maine tumhein pahle kabhi dekha hai kya | मैंने तुम्हें पहले कभी देखा है क्या
- Sanjay shajar
मैंने
तुम्हें
पहले
कभी
देखा
है
क्या
हाँ,
याद
आया
ख़्वाब
में
दिखे
थे
तुम
- Sanjay shajar
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ख़्वाब
पलकों
की
हथेली
पे
चुने
रहते
हैं
कौन
जाने
वो
कभी
नींद
चुराने
आए
मुझ
पे
उतरे
मेरे
अल्हाम
की
बारिश
बन
कर
मुझ
को
इक
बूॅंद
समुंदर
में
छुपाने
आए
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Khalil Ur Rehman Qamar
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ये
तेरे
ख़त
ये
तेरी
ख़ुशबू
ये
तेरे
ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ
हैं
तेरे
कौल
और
क़सम
की
तरह
गुज़िश्ता
साल
मैंने
इन्हें
गिनकर
रक्खा
था
किसी
ग़रीब
की
जोड़ी
हुई
रक़म
की
तरह
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Jaun Elia
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हर
एक
शख़्स
यहाँ
महव-ए-ख़्वाब
लगता
है
किसी
ने
हम
को
जगाया
नहीं
बहुत
दिन
से
Azhar Iqbal
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तूने
देखी
है
वो
पेशानी
वो
रुख़्सार
वो
होंठ
ज़िंदगी
जिनके
तसव्वुर
में
लुटा
दी
हमने
तुझपे
उठी
हैं
वो
खोई
हुई
साहिर
आँखें
तुझको
मालूम
है
क्यूँ
उम्र
गंवा
दी
हमने
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Faiz Ahmad Faiz
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बढ़
के
इम्कान
से
नुक़्सान
उठाए
हुए
हैं
हम
मुहब्बत
में
बहुत
नाम
कमाए
हुए
हैं
मेरे
मौला
मुझे
ता'बीर
की
दौलत
दे
दे
मैंने
इक
शख़्स
को
कुछ
ख़्वाब
दिखाए
हुए
हैं
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Ejaz Tawakkal Khan
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मेरी
नींदें
उड़ा
रक्खी
है
तुम
ने
ये
कैसे
ख़्वाब
दिखलाती
हो
जानाँ
किसी
दिन
देखना
मर
जाऊँगा
मैं
मेरी
क़स
में
बहुत
खाती
हो
जानाँ
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Subhan Asad
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ये
ज़रूरी
है
कि
आँखों
का
भरम
क़ाएम
रहे
नींद
रक्खो
या
न
रक्खो
ख़्वाब
मेयारी
रखो
Rahat Indori
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तलब
करें
तो
ये
आँखें
भी
इन
को
दे
दूँ
मैं
मगर
ये
लोग
इन
आँखों
के
ख़्वाब
माँगते
हैं
Abbas rizvi
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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना
था
वो
ख़्वाब
में
भी
मिले
मैं
नींद
नींद
को
तरसा
मगर
नहीं
सोया
ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल
था
कि
थम
गई
बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म
है
कि
मैं
नहीं
रोया
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Khalil Ur Rehman Qamar
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नींद
भी
जागती
रही
पूरे
हुए
न
ख़्वाब
भी
सुब्ह
हुई
ज़मीन
पर
रात
ढली
मज़ार
में
Adil Mansuri
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इक
दफ़ा
गर
ज़ुबान
दे
देंगे
फिर
तो
ऐसा
है
जान
दे
देंगे
क़ैद
हम
ज़िंदगी
न
रक्खेंगे
पंछियों
को
उड़ान
दे
देंगे
छूट
देंगे
ग़मों
को
रोने
की
आँसुओ
को
ज़ुबान
दे
देंगे
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Sanjay shajar
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ये
अंतिम
फ़ैसला
है
देखते
हैं
किसे
वो
देखता
है
देखते
हैं
मुझे
कुछ
काम
फिर
है
भी
नहीं
सो
तुझे
ही
देखना
है
देखते
हैं
मुझे
तुम
से
मोहब्बत
है
मेरी
जाँ
यही
तो
बोलना
है
देखते
हैं
हमारे
एक
होने
से
जहाँ
में
किसे
क्या
मसअला
है
देखते
हैं
वो
अगले
हम
सेफ़र
को
अब
सफ़र
में
कहाँ
पर
छोड़ता
है
देखते
हैं
रहे
जब
देर
तक
बाहर
उदासी
तब
अंदर
क्या
हुआ
है
देखते
हैं
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Sanjay shajar
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एक
सूरत
का
तलबगार
नहीं
दोस्ती
ठीक
है
पर
प्यार
नहीं
मुझको
लगता
है
ख़ुदा
है
शायद
जिसका
कोई
भी
मददगार
नहीं
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Sanjay shajar
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अपने
बारे
में
लोग
कहते
हैं
सर
जी
मस्ती
में
मस्त
रहते
हैं
Sanjay shajar
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किसी
के
हाथ
में
आया
नहीं
फिर
किसी
के
हाथ
से
छूटा
हुआ
मैं
Sanjay shajar
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