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Sanjay shajar
alag logon se bas itnaa alag hooñ
alag logon se bas itnaa alag hooñ | अलग लोगों से बस इतना अलग हूँ
- Sanjay shajar
अलग
लोगों
से
बस
इतना
अलग
हूँ
अलग
लोगों
का
हुँ
अपना
अलग
हूँ
- Sanjay shajar
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मैं
अपने
आप
में
गहरा
उतर
गया
शायद
मिरे
सफ़र
से
अलग
हो
गई
रवानी
मिरी
Abbas Tabish
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शब-ए-विसाल
बहुत
कम
है
आसमाँ
से
कहो
कि
जोड़
दे
कोई
टुकड़ा
शब-ए-जुदाई
का
Ameer Minai
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मैं
ज़माने
से
अलग
था
और
फिर
कुछ
यूँँ
हुआ
बात
सुनकर
भीड़
की,
मैं
भीड़
जैसा
हो
गया
Divy Kamaldhwaj
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हिन्दी
में
और
उर्दू
में
फ़र्क़
है
तो
इतना
वो
ख़्वाब
देखते
हैं
हम
देखते
हैं
सपना
Unknown
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प्यादों
के
रंग
अलग
है
मगर
जाएँगे
सभी
शतरंज
ख़त्म
होने
पे
बक्से
में
एक
ही
Maher painter 'Musavvir'
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उसके
जाने
और
आने
में
फ़क़त
यह
फ़र्क़
है
दूर
जाती
मौत
है
तो
पास
आती
ज़िन्दगी
Divy Kamaldhwaj
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ये
अलग
बात
कि
ख़ामोश
खड़े
रहते
हैं
फिर
भी
जो
लोग
बड़े
हैं,
वो
बड़े
रहते
हैं
Rahat Indori
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ज़रा
सी
देर
को
सकते
में
आ
गए
थे
हम
कि
एक
दूजे
के
रस्ते
में
आ
गए
थे
हम
जो
अपना
हिस्सा
भी
औरों
में
बाँट
देता
है
एक
ऐसे
शख़्स
के
हिस्से
में
आ
गए
थे
हम
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Ismail Raaz
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जो
पढ़ा
है
उसे
जीना
ही
नहीं
है
मुमकिन
ज़िंदगी
को
मैं
किताबों
से
अलग
रखता
हूँ
Zafar Sahbai
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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उसने
मुझको
न
जाने
क्या
समझा
जिसको
मैंने
सदा
ख़ुदा
समझा
शे'र
सुनकर
के
डिग्रियाँ
पूछी
उसने
मुझको
पढ़ा
लिखा
समझा
आप
समझेंगे
तब
बहुत
मुझको
आपने
गर
मुझे
ज़रा
समझा
यूँँ
हीं
ग़ज़लें
नहीं
कही
उस
पर
उसको
सालों
पढ़ा
सुना
समझा
कर
दिया
हल
किसी
सयाने
ने
मैंने
जब
तक
वो
मसअला
समझा
उसने
ही
बेवफ़ाई
समझाई
जिसको
मैंने
था
बा-वफ़ा
समझा
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Sanjay shajar
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किसी
के
ग़म
में
पागल
हो
गई
हैं
हमारी
आँखें
बादल
हो
गई
हैं
फ़लक
से
कोई
चारा-गर
उतारो
ज़मीं
पर
रूहें
घाइल
हो
गई
हैं
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Sanjay shajar
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बताओ
क्या
बुरा
है
ज़िन्दगी
में
असीरी
में
मज़ा
आ
ही
रहा
है
Sanjay shajar
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गए
हैं
आप
जैसे
वैसे
जाया
भी
नहीं
जाता
भुलाते
फिर
रहे
हैं
हम
भुलाया
भी
नहीं
जाता
Sanjay shajar
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किसी
के
हाथ
में
आया
नहीं
फिर
किसी
के
हाथ
से
छूटा
हुआ
मैं
Sanjay shajar
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