aaj phir gardish-e-taqdeer pe rona aaya | आज फिर गर्दिश-ए-तक़दीर पे रोना आया

  - Sandeep pandit
आजफिरगर्दिश-ए-तक़दीरपेरोनाआया
दिलकीबिगड़ीहुईतस्वीरपेरोनाआया
इश्क़कीक़ैदमेंअबतकतोउमीदोंपेजिए
मिटगईआसतोज़ंजीरपेरोनाआया
क्याहसींख़्वाबमोहब्बतनेदिखायाथाहमें
खुलगईआँखतोता'बीरपेरोनाआया
पहलेक़ासिदकीनज़रदेखकेदिलसहमगया
फिरतिरीसुर्ख़ी-ए-तहरीरपेरोनाआया
दिलगँवाकरभीमोहब्बतकेमज़ेमिलसके
अपनीखोईहुईतक़दीरपेरोनाआया
कितनेमसरूरथेजीनेकीदु'आओंपेशकील
जबमिलेरंजतोतासीरपेरोनाआया
  - Sandeep pandit
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