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Sandeep dabral 'sendy'
vo mujhe ganga si paawan ik nadi si lagti hai
vo mujhe ganga si paawan ik nadi si lagti hai | वो मुझे गंगा सी पावन इक नदी सी लगती है
- Sandeep dabral 'sendy'
वो
मुझे
गंगा
सी
पावन
इक
नदी
सी
लगती
है
मैं
समुंदर
रूप
धर
लूँ
उस
नदी
के
वास्ते
- Sandeep dabral 'sendy'
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पहले
उसकी
ख़ुशबू
मैंने
ख़ुद
पर
तारी
की
फिर
मैंने
उस
फूल
से
मिलने
की
तैयारी
की
इतना
दुख
था
मुझको
तेरे
लौट
के
जाने
का
मैंने
घर
के
दरवाजों
से
भी
मुँह
मारी
की
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Tehzeeb Hafi
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पूरी
कायनात
में
एक
क़ातिल
बीमारी
की
हवा
हो
गई
वक़्त
ने
कैसा
सितम
ढाया
कि
दूरियाँ
ही
दवा
हो
गईं
Unknown
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तुमने
जो
फूल
लेते
में
छू
लीं
हैं
उंगलियाँ
मेरे
बदन
से
आएगी
ख़ुशबू
गुलाब
की
Siddharth Saaz
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साथ
चलते
जा
रहे
हैं
पास
आ
सकते
नहीं
इक
नदी
के
दो
किनारों
को
मिला
सकते
नहीं
उसकी
भी
मजबूरियाँ
हैं
मेरी
भी
मजबूरियाँ
रोज़
मिलते
हैं
मगर
घर
में
बता
सकते
नहीं
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Bashir Badr
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चल
दिए
घर
से
तो
घर
नहीं
देखा
करते
जाने
वाले
कभी
मुड़
कर
नहीं
देखा
करते
सीपियां
कौन
किनारे
से
उठा
कर
भागा
ऐसी
बाते
समुंदर
नहीं
देखा
करते
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Unknown
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ये
जिस्म
तंग
है
सीने
में
भी
लहू
कम
है
दिल
अब
वो
फूल
है
जिस
में
कि
रंग-ओ-बू
कम
है
Pallav Mishra
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पत्थर
दिल
के
आँसू
ऐसे
बहते
हैं
जैसे
इक
पर्वत
से
नदी
निकलती
है
Shobhit Dixit
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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बुरी
सरिश्त
न
बदली
जगह
बदलने
से
चमन
में
आ
के
भी
काँटा
गुलाब
हो
न
सका
Arzoo Lakhnavi
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शैदा
हूँ
मैं
भी
शम'अ
का
याँ
इसलिए
रस्मन
मुझे
क़ुर्बान
होना
होगा
याँ
Sandeep dabral 'sendy'
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रफ़्ता-रफ़्ता
उतरा
है
वो
शख़्स
मिरे
दिल
से
गाहे
जिसकी
मेरे
दिल
पे
हुकूमत
चलती
थी
Sandeep dabral 'sendy'
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जिसने
नज़राने
में
इक
रोज़
ये
घड़ी
थी
दी
आज
उसी
के
पास
हमारे
लिए
समय
नइँ
है
Sandeep dabral 'sendy'
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सुना
रक़ीब
तवज्जो
न
अब
उन्हें
देते
इसी
लिए
वो
हमारे
क़रीब
आए
हैं
Sandeep dabral 'sendy'
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दिल
में
हमारे
अब
तुम्हारी
यादों
का
खाता
न
है
सब
झूठ
कहते
हैं
कि
अब
याँ
आपसी
नाता
न
है
आओ
कभी
मिलने
तो
थोड़ा
वक़्त
लेकर
आना
तुम
हमको
कलाई
पर
यूँँ
नज़रें
फेरना
भाता
न
है
होगी
हमारे
बीच
वार्तालाप
इत्मीनान
से
यूँँ
शीघ्रता
से
आँखें
पढ़ना
अब
हमें
आता
न
है
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Sandeep dabral 'sendy'
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