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Sandeep dabral 'sendy'
jhumke ko komal gaalon ka bosa lete dekh
jhumke ko komal gaalon ka bosa lete dekh | झुमके को कोमल गालों का बोसा लेते देख
- Sandeep dabral 'sendy'
झुमके
को
कोमल
गालों
का
बोसा
लेते
देख
ख़्वाहिश
है
मेरी
मैं
भी
इक
झुमका
हो
जाऊँ
- Sandeep dabral 'sendy'
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क्या
ख़ूब
तुम
ने
ग़ैर
को
बोसा
नहीं
दिया
बस
चुप
रहो
हमारे
भी
मुँह
में
ज़बान
है
Mirza Ghalib
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दिखा
के
जुम्बिश-ए-लब
ही
तमाम
कर
हम
को
न
दे
जो
बोसा
तो
मुँह
से
कहीं
जवाब
तो
दे
Mirza Ghalib
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रखे
है
लज़्ज़त-ए-बोसा
से
मुझ
को
गर
महरूम
तो
अपने
तू
भी
न
होंटों
तलक
ज़बाँ
पहुँचा
Jurat Qalandar Bakhsh
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हज़ारों
मन्नतों
पर
भी
कोई
बोसा
नहीं
मिलता
किसी
सूरत
में
उस
कंजूस
के
बटुए
नहीं
खुलते
Kushal Dauneria
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लब-ए-ख़याल
से
उस
लब
का
जो
लिया
बोसा
तो
मुँह
ही
मुँह
में
अजब
तरह
का
मज़ा
आया
Jurat Qalandar Bakhsh
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बोसा
लिया
जो
उस
लब-ए-शीरीं
का
मर
गए
दी
जान
हम
ने
चश्मा-ए-आब-ए-हयात
पर
Ameer Minai
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सुब्ह
सवेरे
नंगे
पाँव
घास
पे
चलना
ऐसा
है
जैसे
बाप
का
पहला
बोसा
क़ुर्बत
जैसे
माँओं
की
Hammad Niyazi
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बदन
का
सारा
लहू
खिंच
के
आ
गया
रुख़
पर
वो
एक
बोसा
हमें
दे
के
सुर्ख़-रू
है
बहुत
Zafar Iqbal
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बोसा
जो
रुख़
का
देते
नहीं
लब
का
दीजिए
ये
है
मसल
कि
फूल
नहीं
पंखुड़ी
सही
Sheikh Ibrahim Zauq
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न
हो
बरहम
जो
बोसा
बे-इजाज़त
ले
लिया
मैं
ने
चलो
जाने
दो
बेताबी
में
ऐसा
हो
ही
जाता
है
Jalal Lakhnavi
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सब
कुछ
देख
नज़र
फिर
भी
ख़ाली
ख़ाली
सी
है
यार
बहुत
दिन
से
हँसता
मज़दूर
नहीं
देखा
Sandeep dabral 'sendy'
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जिसने
नज़राने
में
इक
रोज़
ये
घड़ी
थी
दी
आज
उसी
के
पास
हमारे
लिए
समय
नइँ
है
Sandeep dabral 'sendy'
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तुम
जिसके
साथ
देखते
हो
याँ
अपने
घर
के
सपने
अक्सर
वो
लड़की
देखा
करती
है
अफ़सर
के
सपने
इक
रोज़
हिज्र
अपने
शबाब
पर
होगा
और
पूछो
मत
तुम
देखते
रहोगे
फिर
केवल
नामा-बर
के
सपने
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Sandeep dabral 'sendy'
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किताबों
में,
ख़तों
में
तो
कभी
तस्वीरों
में
'सैंडी'
वो
यादें
कुछ
नई
औ'
कुछ
पुरानी
ढूँढ़ते
अपनी
Sandeep dabral 'sendy'
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याद
तो
उनको
किया
जाता
है
जिनको
याँ
बिसरा
दिया
जाता
है
होता
है
बैर
भला
साँसों
से
संग
उनके
तो
जिया
जाता
है
जीत
पक्की
यहाँ
हो
जाती
है
मन
से
गर
मान
लिया
जाता
है
याँ
हैं
कुछ
ऐसे,
सहारे
जिनके
दो
घड़ी
और
जिया
जाता
है
हर
किसी
को
दिखा
सकते
नइँ
सो
गिरते
अश्कों
को
पिया
जाता
है
रौशनी
हर-सू
छा
जाती
है
बस
तम
में
जब
एक
दिया
जाता
है
रूह
दाइम
यहाँ
ज़ख़्मी
रहती
जिस्म
का
ज़ख़्म
सिया
जाता
है
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