apni masti ki tere qurb kii sarshaari men | अपनी मस्ती कि तेरे क़ुर्ब की सरशारी में

  - Sanaullah Zaheer
अपनीमस्तीकितेरेक़ुर्बकीसरशारीमें
अबमैंकुछऔरभीआसानहूँदुश्वारीमें
कितनीज़रख़ेज़हैनफ़रतकेलिएदिलकीज़मीं
वक़्तलगताहीनहींफ़स्लकीतैयारीमें
इकत'अल्लुक़कोबिखरनेसेबचानेकेलिए
मेरेदिनरातगुज़रतेहैंअदाकारीमें
ज़मानेमेंतिरेअश्कभीरोलूँगामगर
अभीमसरूफ़हूँख़ुदअपनीअज़ा-दारीमें
वोकिसीऔरदवासेमेराकरताहैइलाज
मुब्तलाहूँमैंकिसीऔरहीबीमारीमें
उसकेकमरेसेउठालायाहूँयादेंअपनी
ख़ुदपड़ारहगयालेकिनकिसीअलमारीमें
अपनीतामीरउठातेतोकोईबातभीथी
तुमनेइकउम्रगँवादीमेरीमिस्मारीमें
  - Sanaullah Zaheer
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