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salman khan "samar"
tum maang agar lete to jaan bhi de deta
tum maang agar lete to jaan bhi de deta | तुम माँग अगर लेते तो जान भी दे देता
- salman khan "samar"
तुम
माँग
अगर
लेते
तो
जान
भी
दे
देता
छीना
है
मिरा
हक़
क्यूँँ
मुझको
ये
शिकायत
है
- salman khan "samar"
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ये
मैंने
कब
कहा
कि
मेरे
हक़
में
फ़ैसला
करे
अगर
वो
मुझ
से
ख़ुश
नहीं
है
तो
मुझे
जुदा
करे
मैं
उसके
साथ
जिस
तरह
गुज़ारता
हूँ
ज़िंदगी
उसे
तो
चाहिए
कि
मेरा
शुक्रिया
अदा
करे
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Tehzeeb Hafi
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उस
मुल्क
की
सरहद
को
कोई
छू
नहीं
सकता
जिस
मुल्क
की
सरहद
की
निगहबान
हैं
आँखें
Unknown
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मैं
ख़ुद
भी
यार
तुझे
भूलने
के
हक़
में
हूँ
मगर
जो
बीच
में
कम-बख़्त
शा'इरी
है
ना
Afzal Khan
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बहुत
बर्बाद
हैं
लेकिन
सदा-ए-इंक़लाब
आए
वहीं
से
वो
पुकार
उठेगा
जो
ज़र्रा
जहाँ
होगा
Ali Sardar Jafri
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कुछ
रिश्तों
में
दिल
को
आज़ादी
नइँ
होती
कुछ
कमरों
में
रौशनदान
नहीं
होता
है
Vikram Gaur Vairagi
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लहू
वतन
के
शहीदों
का
रंग
लाया
है
उछल
रहा
है
ज़माने
में
नाम-ए-आज़ादी
Firaq Gorakhpuri
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तू
मुझे
छोड़
के
ठुकरा
के
भी
जा
सकती
है
तेरे
हाथों
में
मेरे
हाथ
हैं
ज़ंजीर
नहीं
Sahir Ludhianvi
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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फिर
नए
साल
की
सरहद
पे
खड़े
हैं
हम
लोग
राख
हो
जाएगा
ये
साल
भी
हैरत
कैसी
Aziz Nabeel
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दोस्त
अपना
हक़
अदा
करने
लगे
बेवफ़ाई
हमनवा
करने
लगे
मेरे
घर
से
एक
चिंगारी
उठी
पेड़
पत्ते
सब
हवा
करने
लगे
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Santosh S Singh
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अब
ख़त्म
हुआ
दौर
ये
कॉलेज
से
हमारा
होना
है
जुदा
हमको
बड़े
शौक़
से
यारा
अश्कों
से
निगाहों
को
यहाँ
तर
भी
करेंगे
पर
हो
न
सकेंगी
ये
मुलाक़ात
दुबारा
आँखों
में
उमंगे
भी
उदासी
भी
दिखेगी
पर
दिख
न
सकेगा
कभी
यारों
का
नज़ारा
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salman khan "samar"
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दो
मुझे
सजा
सनम
फिर
करी
खता
सनम
वायदों
से
कुछ
नहीं
हो
सका
मिरा
सनम
मिल
सके
न
तुम
कभी
ग़म
मुझे
ये
था
सनम
ज़िन्दगी
ये
कुछ
नहीं
नाम
है
तिरा
सनम
कायदा
किया
करो
अपने
इश्क़
का
सनम
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salman khan "samar"
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हम
एक
दूसरे
के
लिए
ही
बने
थे
पर
इक
तीसरे
ने
हम
को
जुदा
कर
दिया
है
दोस्त
salman khan "samar"
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मजबूत
हैं
उसूल
बुज़ुर्गों
के
आज
भी
देखो
तो
आज़मा
के
उन्हें
एक
बार
तुम
salman khan "samar"
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मन
ही
मन
ख़ुद
को
हँसाते
थे
कभी
बचपन
में
अनगिनत
ख़्वाब
सजाते
थे
कभी
बचपन
में
salman khan "samar"
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