sheeshe kii chamak kuchh bhi nahin aage tumhaare | शीशे की चमक कुछ भी नहीं आगे तुम्हारे

  - salman khan "samar"
शीशेकीचमककुछभीनहींआगेतुम्हारे
चंदनकीमहककुछभीनहींआगेतुम्हारे
बेताबसारहताहूँतिरेसाज़केख़ातिर
पायलकीछनककुछभीनहींआगेतुम्हारे
उम्मतभीकरेनाज़अदाओंपेतुम्हारी
हूरोंकीझलककुछभीनहींआगेतुम्हारे
मैंघूमकरआयाहूँअभीसातफ़लकपर
येसातफ़लककुछभीनहींआगेतुम्हारे
रागोंकोभीशागिर्दकरेंबोलतुम्हारे
रागोंकीचहककुछभीनहींआगेतुम्हारे
सब्ज़ीकेबहानेसेमैंकहताहूँउसेये
कमहीहैनमककुछभीनहींआगेतुम्हारे
रौशनसाकोईएकसिताराहैवोसलमान
उसकीवोचमककुछभीनहींआगेतुम्हारे
  - salman khan "samar"
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy