दैर-ओ-हरम के नाम से कोसों मैं दूर हूँ

  - salman khan "samar"
दैर-ओ-हरमकेनामसेकोसोंमैंदूरहूँ
सजदेहज़ारकरलिएपायाकुछसुकूँ
उम्मीदछोड़छाड़केसारेजहानसे
कहताहैमनकेसबसेत'अल्लुक़बिगाड़लूँ
अंदरकेशोरनेमुझेख़ामोशकरदिया
मुझकोभीसुनलेकोईतोमैंबोलतारहूँ
उसकेक़रीबबैठकेबैठारहाख़मोश
दिलचाहताथाउससेेज़रागुफ़्तगूकरूँँ
मुट्ठीमेंबंदएकपरिन्देकोखोलकर
तुझकोसमेटलूँयामैंख़ुदकोसमेटलूँ
इनगेसुओंकोकसके'समर'बाँधदूँमगर
आरिज़पेएकज़ुल्फ़बढ़ाकरकेछोड़दूँ
  - salman khan "samar"
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