bewajah mujhko rulaate the kabhi bachpan men | बेवजह मुझको रुलाते थे कभी बचपन में

  - salman khan "samar"
बेवजहमुझकोरुलातेथेकभीबचपनमें
मुस्कुराकरकेमनातेथेकभीबचपनमें
उनदिनोंज़ेहनमेंतेराहीतसव्वुररखकर
अपनेदिनरातबितातेथेकभीबचपनमें
हमभीगलियोंमेंसर-ए-आमफिराकरतेथे
महफ़िलेंख़ूबसजातेथेकभीबचपनमें
भूलबैठेहैजवानीमेंसभीख़ुशियोंको
हमभीत्योहारमनातेथेकभीबचपनमें
अबतोख़ामोशखड़ेरहतेहैंवोबाप'समर'
जोकिसीनेसेलगातेथेकभीबचपनमें
  - salman khan "samar"
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