jis tarah se phoolon kii daliyaan mehkati hain | जिस तरह से फूलों की डालियाँ महकती हैं

  - SALIM RAZA REWA
जिसतरहसेफूलोंकीडालियाँमहकतीहैं
मेरेघरकेआँगनमेंबेटियाँमहकतीहैं
फूलसाबदनतेराइसक़दरमोअत्तरहै
ख़्वाबमेंभीछूलूँतोउँगलियाँमहकतीहैं
माँनेजोखिलाईथींअपनेप्यारेहाथोंसे
ज़ेहनमेंअभीतकवोरोटियाँमहकतीहैं
उम्रसारीगुज़रीहोजिसकीहक़-परस्तीमें
उसकीतोक़यामततकनेकियाँमहकतीहैं
होगई'रज़ा'रुख़्सतघरसेबेटियाँलेकिन
अबतलकनिगाहोंमेंडोलियाँमहकतीहैं
  - SALIM RAZA REWA
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