ज़िंदगीमौतकेपहलूमेंभलीलगतीहै
घासइसक़ब्रपेकुछऔरहरीलगतीहै
रोज़काग़ज़पेबनाताहूँमैंक़दमोंकेनुक़ूश
कोईचलतानहींऔरहम-सफ़रीलगतीहै
आँखमानूस-ए-तमाशानहींहोनेपाती
कैसीसूरतहैकिहररोज़नईलगतीहै
घासमेंजज़्बहुएहोंगेज़मींकेआँसू
पाँवरखताहूँतोहल्कीसीनमीलगतीहै
सचतोकहदूँमगरइसदौरकेइंसानोंको
बातजोदिलसेनिकलतीहैबुरीलगतीहै
मेरेशीशेमेंउतरआईहैजोशाम-ए-फ़िराक़
वोकिसीशहर-ए-निगाराँकीपरीलगतीहै
बूँदभरअश्कभीटपकानकिसीकेग़ममें
आजहरआँखकोईअब्र-ए-तहीलगतीहै
शोर-ए-तिफ़्लाँभीनहींहैनरक़ीबोंकाहुजूम
लौटआओयेकोईऔरगलीलगतीहै
घरमेंकुछकमहैयेएहसासभीहोताहै'सलीम'
येभीखुलतानहींकिसशयकीकमीलगतीहै