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Saket Sharma
Baat karne mein jab khalal aaya
बात करने में जब ख़लल आया
- Saket Sharma
बात
करने
में
जब
ख़लल
आया
सच
ज़बाँ
से
भी
तब
निकल
आया
वो
मुझे
टालता
रहा
अब
तक
यार
उस
का
कभी
न
कल
आया
मेरी
उम्मीद
से
बहुत
जल्दी
वो
ये
चेहरा
कहीं
बदल
आया
रोक
पाते
तो
ही
सही
होता
आँख
से
अश्क
ये
उछल
आया
कौन
'साकेत'
जब
सुना
मैंने
दूर
ही
से
मैं
फिर
निकल
आया
- Saket Sharma
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उसे
भी
बोलना
शायद
वही
था
मुझे
पर
वो
नहीं
सुनना
कभी
भी
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दुख
है
चलता
रहता
है
सबने
सब
कुछ
खोया
है
उसको
जैसे
करना
है
वैसे
ही
सब
होना
है
सब
कुछ
अच्छा
करने
पे
क्या
सब
अच्छा
होता
है
मर
भी
जाए
कोई
जब
क्या
सच
में
वो
ज़िंदा
है
शायद
तुमको
आज
लगे
ये
अफ़सुर्दा
लिखता
है
इतना
दुख
मत
दे
मालिक
बंदा
तुझको
जपता
है
कैसे
क़िस्मत
से
साकेत
अब
तक
लड़ता
आया
है
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Saket Sharma
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उसी
को
था
मुयस्सर
भूल
जाना
हमारे
बस
का
ये
सौदा
नहीं
है
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आदतन
ख़ुद
ही
इक
झमेला
हूँ
दूर
मत
जा
बहुत
अकेला
हूँ
Saket Sharma
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ज़माने
के
बताने
से
चलेगा
क्या
हवाओं
के
डराने
से
डरेगा
क्या
किसी
को
शौक़
रोटी
गर्म
खाने
का
कहीं
डर
आज
चूल्हा
भी
जलेगा
क्या
बताता
था
जिसे
ख़ुद
का
उसी
को
अब
तेरा
कुछ
बोलना
अच्छा
लगेगा
क्या
तू
है
हारा
हुआ
इक
आदमी
साकेत
उसे
तुझ
से
लगा
कर
दिल
मिलेगा
क्या
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Saket Sharma
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