सितारेयूँँशाम-ओ-सहरदेखतेहैं
नज़ारेज्यूँँअहल-ए-नज़रदेखतेहैं
रहाकबनशेमनयेयादोंसेख़ाली
तुम्हेंदेखतेहैंजिधरदेखतेहैं
सबाजबकभीचलतीहैतुझकोछूकर
गुलिस्ताँमेंतेराअसरदेखतेहैं
सुकूनतथीजिनकीयेआँखेंहमारी
नजानेवोकिसकीनज़रदेखतेहैं
नआनेकोवापसतोतूजाचुकाहै
मगरराहयेबाम-ओ-दरदेखतेहैं