दिलों को तोड़ने वालो तुम्हें किसी से क्या

  - Saifuddin Saif
दिलोंकोतोड़नेवालोतुम्हेंकिसीसेक्या
मिलोतोआँखचुरालोतुम्हेंकिसीसेक्या
हमारीलग़्ज़िश-ए-पाकाख़यालक्यूँँहैतुम्हें
तुमअपनीचालसँभालोतुम्हेंकिसीसेक्या
चमककेऔरबढ़ाओमिरीसियह-बख़्ती
किसीकेघरकेउजालोतुम्हेंकिसीसेक्या
नज़रबचाकेगुज़रजाओमेरीतुर्बतसे
किसीपेख़ाकडालोतुम्हेंकिसीसेक्या
मुझेख़ुदअपनीनज़रमेंबनाकेबेगाना
जहाँकोअपनाबनालोतुम्हेंकिसीसेक्या
क़रीब-ए-नज़अ'भीक्यूँँचैनलेसकेकोई
नक़ाबरुख़सेउठालोतुम्हेंकिसीसेक्या
  - Saifuddin Saif
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