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shafiqe saifi
gham ke maaron ka gham kya jaano tum
gham ke maaron ka gham kya jaano tum | ग़म के मारों का ग़म क्या जानो तुम
- shafiqe saifi
ग़म
के
मारों
का
ग़म
क्या
जानो
तुम
तुम
क्या
यूँँ
काली
रातें
करते
हो
मतलब
बातों
का
कैसे
समझोगे
तुम
तो
मतलब
से
बातें
करते
हो
- shafiqe saifi
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और
भी
दुख
हैं
ज़माने
में
मोहब्बत
के
सिवा
राहतें
और
भी
हैं
वस्ल
की
राहत
के
सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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ये
किस
मक़ाम
पे
लाई
है
ज़िंदगी
हम
को
हँसी
लबों
पे
है
सीने
में
ग़म
का
दफ़्तर
है
Hafeez Banarasi
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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बहुत
से
ग़म
समेट
कर
बनाई
एक
डायरी
चुवाव
देख
रात
भर
बनाई
एक
डायरी
ये
हर्फ़
हर्फ़
लफ़्ज़
लफ़्ज़
क़ब्र
है
वरक़
वरक़
दिल-ए-हज़ीं
से
इस
क़दर
बनाई
एक
डायरी
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Aves Sayyad
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खुशियाँ
उसी
के
साथ
हैं
जो
ग़म
गुसार
है
ऐसे
हरेक
शख़्स
ही
दुनिया
का
यार
है
Sunny Seher
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अब
क्या
ही
ग़म
मनाएँ
कि
क्या
क्या
हुआ
मियाँ
बर्बाद
होना
ही
था
सो
बर्बाद
हो
गए
shaan manral
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पत्थर
के
जिगर
वालो
ग़म
में
वो
रवानी
है
ख़ुद
राह
बना
लेगा
बहता
हुआ
पानी
है
Bashir Badr
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आधी
से
ज़ियादा
शब-ए-ग़म
काट
चुका
हूँ
अब
भी
अगर
आ
जाओ
तो
ये
रात
बड़ी
है
Saqib lakhanavi
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हमारे
सैकड़ों
दुख
थे,
और
उस
में
एक
दुख
ये
भी
जो
हम
से
हो
के
गुज़रे
थे,
हमें
दीवार
कहते
थे
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Siddharth Saaz
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आज
तो
बे-सबब
उदास
है
जी
इश्क़
होता
तो
कोई
बात
भी
थी
Nasir Kazmi
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क्या
बताऊँ
मैं
तुमको
कहानी
मेरी
ज़िंदगी
खा
गई
है
जवानी
मेरी
मेरे
सीने
पे
कश्ती
चलाओगे
तुम
तुमने
देखी
कहाँ
है
रवानी
मेरी
सब
सेे
कहता
है
मुझको
भुला
भी
चुका
पास
रखता
है
लेकिन
निशानी
मेरी
मेरी
नींदों
को
बर्बाद
करके
शफीक
चैन
से
सो
रही
है
वो
रानी
मेरी
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shafiqe saifi
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ज़िंदगी
के
सफ़र
नहीं
रुकते
हम
तो
अपने
ही
घर
नहीं
रुकते
उसको
हँसना
भी
आ
गया
अब
तो
मेरे
आँसू
मगर
नहीं
रुकते
पहले
रुकते
थे
मेरी
आहट
पे
अब
मुझे
देखकर
नहीं
रुकते
तुझको
फिर
बदगुमानी
हो
जाती
तेरी
ख़ातिर
अगर
नहीं
रुकते
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shafiqe saifi
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मैं
इस
सच
से
बहुत
ख़ुश
हूँ
के
वो
सच
में
बहुत
ख़ुश
है
shafiqe saifi
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हम
सेे
उसकी
कॉल
तक
कटती
नहीं
ज़िंदगी
काटेंगे
कैसे
उसके
बिन
shafiqe saifi
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मैंने
तो
मैथ
भी
ले
रक्खी
थी
मुश्किलें
फिर
भी
हल
नहीं
होती
shafiqe saifi
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