har ek phool ke daaman men khaar kaisa hai | हर एक फूल के दामन में ख़ार कैसा है

  - Sahir Hoshiyarpur
हरएकफूलकेदामनमेंख़ारकैसाहै
बताएकौनकिरंग-ए-बहारकैसाहै
वोसामनेथेतोदिलकोसुकूँथाहासिल
चलेगएहैंतोअबबे-क़रारकैसाहै
यक़ीनथाकिआएगामुझसेमिलनेकोई
तोफिरयेदिलकोमिरेइंतिज़ारकैसाहै
अगरकिसीनेतुम्हाराभीदिलनहींतोड़ा
तोआँसुओंकारवाँआबशारकैसाहै
मुझेख़बरहैकिहैबे-वफ़ाभीज़ालिमभी
मगरवफ़ाकातिरीए'तिबारकैसाहै
तिरेमकानकीदीवारपरजोहैचस्पाँ
तलाशकिसकीहैयेइश्तिहारकैसाहै
येकिसकेख़ूनसेहैदामन-ए-चमनरंगीं
येसुर्ख़फूलसर-ए-शाख़-दारकैसाहै
अबउनकीबर्क़-ए-नज़रकोदिखाओआईना
वोपूछतेहैंदिल-ए-बे-क़रारकैसाहै
मिरीख़बरतोकिसीकोनहींमगर'अख़्तर'
ज़मानाअपनेलिएहोशियारकैसाहै
  - Sahir Hoshiyarpur
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