raaton ka tasavvur hai unka aur chupke-chupke rona hai | रातों का तसव्वुर है उनका और चुपके-चुपके रोना है

  - Saghar Nizami
रातोंकातसव्वुरहैउनकाऔरचुपके-चुपकेरोनाहै
सुब्हकेतारेतूहीबताअन्जाममिराक्याहोनाहै
इननौ-रसआँखोंवालोंकाक्याहंसनाहै,क्यारोनाहै
बरसेहुएसच्चेमोतीहैंबहताहुआख़ालिससोनाहै
दिलकोखोयाख़ुदभीखोए,दुनियाखोई,दीनभीखोया
येगुम-शुदगीहैतोइकदिनदोस्ततुझेभीखोनाहै
तमईज़-ए-कमाल-ओ-नक्सउठायेतोरौशनहैदुनियापर
मैंचन्दनहूँतूकुन्दनहैमैंमिट्टीहूंतूसोनाहै
तूयेसमझलिल्लाहकिहैतस्कीनतिरेदीवानोंको
वहशतमेंहमाराहंसपड़नादर-अस्लहमारारोनाहै
मातमहैमेरीआवाज़शिकस्त-ए-साज-ए-दिल-ए-सद-पाराका
’सागर’मेरानग़्माभीदीपककेसुरोंमेंरोनाहै
  - Saghar Nizami
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