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Sagheer Lucky
tumhaari aankh men thehra hua hooñ
tumhaari aankh men thehra hua hooñ | तुम्हारी आँख में ठहरा हुआ हूँ
- Sagheer Lucky
तुम्हारी
आँख
में
ठहरा
हुआ
हूँ
कभी
आँसू
कभी
सपना
हुआ
हूँ
मैं
किसके
हाथ
की
ज़ीनत
बनूँगा
हिनाई
शाख़
से
टूटा
हुआ
हूँ
तेरे
दिल
में
जगह
अपनी
बना
ली
मैं
ख़ुश्बू
की
तरह
फैला
हुआ
हूँ
समेटे
आ
के
माला
ही
बना
ले
मैं
बासी
फूल
सा
बिखरा
हुआ
हूँ
कोई
सिलवट
नहीं
है
बिस्तरों
पर
कई
रातों
का
मैं
जागा
हुआ
हूँ
मुहब्बत
की
कशिश
भारी
पड़ी
है
तुम्हारे
शह्र
में
आया
हुआ
हूँ
यहाँ
कोई
नहीं
होता
किसी
का
ख़ुशी
तंगी
से
भी
गुज़रा
हुआ
हूँ
नहीं
कुछ
होश
बाक़ी
है
ज़रा
भी
मुहब्बत
में
दिवानों
सा
हुआ
हूँ
अबस
बच्चा
समझते
हैं
अभी
तक
मैं
हर
इक
दौर
से
गुज़रा
हुआ
हूँ
जिसे
वालिद
की
शफक़त
मानते
हो
मैं
उसकी
छाँव
में
बैठा
हुआ
हूँ
अभी
फुर्सत
नहीं
है
कुछ
लकी
जी
बहुत
से
काम
में
उलझा
हुआ
हूँ
- Sagheer Lucky
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रोशनी
बढ़ने
लगी
है
शहर
की
चाँद
छत
पर
आ
गया
है
देखिए
Divy Kamaldhwaj
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रोज़
बस्ते
हैं
कई
शहर
नए
रोज़
धरती
में
समा
जाते
हैं
Kaifi Azmi
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बस्ती
में
अपनी
हिन्दू
मुसलमाँ
जो
बस
गए
इंसाँ
की
शक्ल
देखने
को
हम
तरस
गए
Kaifi Azmi
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देखें
क़रीब
से
भी
तो
अच्छा
दिखाई
दे
इक
आदमी
तो
शहर
में
ऐसा
दिखाई
दे
Zafar Gorakhpuri
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अनोखी
वज़्अ
है
सारे
ज़माने
से
निराले
हैं
ये
'आशिक़
कौन
सी
बस्ती
के
या-रब
रहने
वाले
हैं
Allama Iqbal
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'अंजुम'
तुम्हारा
शहर
जिधर
है
उसी
तरफ़
इक
रेल
जा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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किसे
है
वक़्त
मोहब्बत
में
दर-ब-दर
भटके
मैं
उसके
शहर
गया
था
किसी
ज़रूरत
से
Riyaz Tariq
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तमाम
शहर
की
ख़ातिर
चमन
से
आते
हैं
हमारे
फूल
किसी
के
बदन
से
आते
हैं
Farhat Ehsaas
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अब
के
सावन
में
शरारत
ये
मिरे
साथ
हुई
मेरा
घर
छोड़
के
कुल
शहर
में
बरसात
हुई
Gopaldas Neeraj
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पत्थर
के
ख़ुदा
पत्थर
के
सनम
पत्थर
के
ही
इंसाँ
पाए
हैं
तुम
शहर-ए-मोहब्बत
कहते
हो
हम
जान
बचा
कर
आए
हैं
Sudarshan Fakir
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वस्ल
होता
है
क्या
ये
तुम
समझो
हम
तो
इस
हिज्र
के
दिवाने
हैं
Sagheer Lucky
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अब
मेरे
दर्द
की
और
ग़म
की
बड़ी
है
यारी
ज़ख़्म
कितना
भी
हो
गहरा
मैं
वो
सह
जाता
हूँ
जब
वो
कहती
है
'लकी'
मुझको
भुला
तुम
दोगे
ग़ैर
मुम्किन
है
रवानी
में
ये
कह
जाता
हूँ
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Sagheer Lucky
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तुम
मेरे
हाथ
पे
सोई
हो
है
ये
एहसाँ
मगर
मेरे
सीने
पे
जो
सोती
तो
मज़ा
और
ही
था
Sagheer Lucky
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बिगड़ा
हुआ
नसीब
हमारा
चमक
गया
आप
आ
गए
तो
घर
भी
हमारा
महक
गया
दुश्मन
ने
मेरे
साथ
चली
इस
तरह
से
चाल
फूलों
से
मेरी
राह
के
काँटों
को
ढक
गया
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Sagheer Lucky
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वो
छोड़
कर
गए
हैं
तो
दिल
है
बहुत
उदास
ख़ामोशियों
से
कह
दो
ज़रा
गुफ़्तगू
करें
Sagheer Lucky
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