nazm mazdoor | नज़्म: मज़दूर

  - Sagar Agrawal
नज़्म:मज़दूर
कौनहैयहाँहमाराकिसकेहैंहम
ख़जालतहैहमकोकिमज़दूरहैंहम
तपातपाकरजिस्मअपना
आहनोंपरपिघलायाहमने
नसोंसेटपकताथालहूजब
मिट्टीकेघरौंदेबनाएहमने
लिएबदनपेछालेअब
दश्त-ए-ला-मकाँफिरतेहैंहम
कौनहैयहाँहमाराकिसकेहैंहम
ख़जालतहैहमकोकिमज़दूरहैंहम
सुब्हहोतेहीनमकछिड़कता
हैसूरजजिनकेज़ख़्मोंपे
औरराततंज़करतीहो
मुफ़्लिसीपेजिनकी
आसमाँकीथालीमेंएकरोटीसमझे
बच्चेतकतेरहतेहोंचाँदको
ऐसेबद-क़िस्मतबच्चोंकेमाँ-बापहैंहम
कौनहैयहाँहमाराकिसकेहैंहम
ख़जालतहैहमकोकिमज़दूरहैंहम
  - Sagar Agrawal
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy