thaki aankhoñ ne samjho chain ka bistar nahin paaya | थकी आँखों ने समझो चैन का बिस्तर नहीं पाया

  - Sagar Sahab Badayuni
थकीआँखोंनेसमझोचैनकाबिस्तरनहींपाया
समझताथाजिसेअपनावहीअकसरनहींपाया
मैंभीदोवक़्तकीरोटीकमानेघरसेनिकलाथा
कमानेशहरक्याआयाकभीफिरघरनहींपाया
जिसेदेखोलगाहैबससुनानेझूटकीदुनिया
सुख़नमेंएकभीशाइरकोपेशा-वरनहींपाया
मिरेहीसामनेशादीकेफेरेलेरहीथीवो
मिरीग़ुरबतमिरेहालातमैंकुछकरनहींपाया
हमेंइसबातकाभीदुखनहींहैंनफ़रतेंहासिल
हमेंग़महैंमुहब्बतकाकभीसागरनहींपाया
  - Sagar Sahab Badayuni
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy