रुसवा हुई वो जाने लगी जब मज़ार से

  - Sagar Sahab Badayuni
रुसवाहुईवोजानेलगीजबमज़ारसे
चीखेंमिरीथीआनेलगींहरदरारसे
सोचारहेंगेहमकभीआग़ोशयारमें
दिलयेकभीलगाहीदार-ओ-मदारसे
कुछइसलिएतरसतेरहेप्यारकेलिए
किसमतमेंमौतलिक्खीहैबेबाकप्यारसे
हमबदनसीबलोगहैंहमकोसज़ामिली
वोक़त्लकरकेदिलमिरारहतीकरारसे
सागरसुखादियाहैतिरेइंतिज़ारमें
आयानहींतूदेखनेइकदिनभीप्यारसे
  - Sagar Sahab Badayuni
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