koii ik baat hai jo kha rahi hai andar se | कोई इक बात है जो खा रही है अंदर से

  - Sagar Sahab Badayuni
कोईइकबातहैजोखारहीहैअंदरसे
मुस्कुराहटभीमिरीजारहीहैअंदरसे
रातदिनरोनेकीआवाज़मुझेआतीहै
परयेआवाज़मिरेरहीहैअंदरसे
धूपख़ुशियोंकीगईजबसेउदासीतबसे
सरसेनाख़ूनतलकछारहीहैअंदरसे
तुमकोसुननेमेंलगेगायेतरन्नुमजैसा
दुखयेतकलीफ़मिरीगारहीहैअंदरसे
तुझसेउम्मीदथीतूभीसितमढाएगा
वैसेभीरूहसितमढारहीहैअंदरसे
  - Sagar Sahab Badayuni
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