ख़त्म हो जाएँगे जब ज़ुल्म तलबगारों के

  - Sagar Sahab Badayuni
ख़त्महोजाएँगेजबज़ुल्मतलबगारोंके
तख़्तकेतख़्तयेगिरजाएँगेदरबारोंके
हमकोतुमऔरउकसाओअभीरहनेदो
वरनाफिरदौरचलेआएँगेतलवारोंके
इनकोक़िस्सेहीसुनानाबतानासबकुछ
दिलदहलजाएँगेबेकारमेंबेचारोंके
मैंनेमिट्टीकेखिलौनोंसेनिकालाबचपन
बढ़गएदामथेजबशहरमेंगुब्बारोंके
मुझकोआवाज़देबाततोसुनसकतीहै
झूटकहतेहैंसभीकानहैंदीवारोंके
तुमकोभीपैसोंकीलतलगगईहैचारा-गर
अबकिसीकामनहींआओगेबीमारोंके
तुमकोबसदुखतीहुईरगहीदबानाहैफिर
दिखनेलगजाएँगेचेहरेसभीकिरदारोंके
इंतिहादर्दकीबढ़जाएगीजिसदिन'सागर'
तुमकोफिरपारचलेजानाहैइनतारोंके
  - Sagar Sahab Badayuni
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